विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी किए गए हवा गुणवत्ता मानक से 11 गुना ज्यादा जहरीली हवा भारत की है। नासा और संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण के मामले में भारत और चीन क्रमश दुनिया के नंबर एक और दो देश हैं।
डेटा से पता चलता है कि एशिया में 420 करोड़ से अधिक लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा की तुलना में कई गुना अधिक गन्दी हवा में सांस ले रहे हैं। पहले चीन ने खराब वायु गुणवत्ता ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरीं, लेकिन समय के साथ चलते हुए चीन ने अपनी हवा को शुद्ध करने के लिए बहुत काम किया है।
वहीं वायु प्रदूषण के मामले में अब भारत चीन से भी बदतर स्थिति में आ गया है। 2016 के आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन में सुरक्षित सीमा से ऊपर सांस लेने वाले लोगों की समान संख्या है लेकिन भारत में प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अधिक संख्या में हैं। भारत में कम से कम 14 करोड़ लोग डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से अधिक प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं।
द लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2017 में वायु प्रदूषण के कारण 12 लाख 40 हजार भारतीयों की मौत हुई। मृतकों में आधे मरीज ऐसे थे जिनकी उम्र 70 साल से कम थी। प्रदूषण के कारण देश की औसत जीवन प्रत्याशा 1.7 वर्ष कम हो गई है।