भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की दो दिन पहले दिल्ली में हुई मुलाकात औपचारिक नहीं बल्कि शिष्टाचार से जुड़ी थी। पाकिस्तान की पॉलिसी पर राज्यसभा में विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवाल के जवाब में सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए यह बयान दिया है। सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद मसूद अजहर से पूछताछ के मामले में उठे सवाल का भी गोलमोल उत्तर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सपा सांसद विशंभर प्रसाद निषाद द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि पाक विदेश सचिव अजीज अहमद चौधरी हार्ट ऑफ एशिया समारोह में आए थे।
लिहाजा विदेश सचिव एस जयशंकर से उनकी मुलाकात शिष्टाचार के तौर पर हुई ना कि औपचारिक। इस जवाब पर कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने असंतोष जाहिर करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
मसूद अजहर से पूछताछ की संभावना के सवाल को भी टालते हुए सिंह ने थ्योरी ऑफ रेसिप्रोसिटी (आदान-प्रदान का सिद्धांत) को विस्तार से समझा दिया। सिंह ने कहा कि अजहर से पूछताछ के लिए पाक जेआईटी भारत के प्रस्ताव पर अपना जवाब देगा। सिंह के मुताबिक पठानकोट हमले के बाद पाकिस्तान पूरे दबाव में है।
उधर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने भी कहा है कि भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों की मुलाकात विस्तृत द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा नहीं थी। इसमें दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर विचार विमर्श किया।