पूर्वी लद्दाख से भारत और चीनी सेना ने टैंक्स हटाने शुरू किए
- फोटो : ANI
रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकार किया है कि गलवां में उसके सैन्यकर्मी मारे गए थे । उसने उनके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से चार सैन्यकर्मी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवां घाटी में भारत की सेना का सामना करते हुए मारे गए।
भारत ने घटना के तुरंत बाद अपने शहीद सैनिकों के बारे में घोषणा की थी लेकिन चीन ने शुक्रवार से पहले आधिकारिक तौर यह कभी नहीं माना कि उसके सैन्यकर्मी भी झड़प में मारे गए। रूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी टीएएसएस ने 10 फरवरी को खबर दी थी कि गलवां घाटी की झड़प में चीन के 45 सैन्यकर्मी मारे गए थे।
पिछले वर्ष, अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उक्त झड़प में चीन के 35 सैन्यकर्मी मारे गए थे। सिंघुआ विश्वविद्यालय में नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के अनुसंधान विभाग में निदेशक क्वियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि चीन ने घटना की जानकारी का खुलासा इसलिए किया है ताकि उन भ्रामक जानकारियों को खारिज किया जा सके जिनमें कहा गया था कि उक्त घटना में भारत के मुकाबले चीन को अधिक नुकसान पहुंचा था या फिर झड़प की शुरुआत उसकी ओर से हुई थी।
गलवां घाटी में पिछले वर्ष जून में हिंसक झड़प के बाद जब तनाव बहुत बढ़ गया था तब पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के ऊंचाई पर स्थित एवं दुर्गम इलाकों में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में जंगी टैंक, बख्तरबंद वाहन और भारी भरकम उपकरणों की तैनाती की थी।पीएलए ने यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय की है जब पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट से दोनों देश अपने जवानों को हटा रहे हैं।
पूर्वी लद्दाख से भारत और चीनी सेना ने टैंक्स हटाने शुरू किए
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वहीं दस महीने के बाद पूर्वी लद्दाख पर भारतीय और चीनी सेना द्वारा तैनात किए गए टैंकों को हटाया गया। पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के किनारे तैनात किए गए टैंकों को बुधवार को हटाया गया। भारतीय सेना के नॉर्थन कमांड ने टैंकों को हटाने की प्रक्रिया की कई तस्वीरें शेयर की।
पिछले दस महीनों से दोनों देशों की सेनाएं अपने-अपने इलाके में तैनात थी। बता दें कि रक्षा सूत्रों ने जानकारी दी थी कि पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो (झील) के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से भारत और चीन की सेनाओं की वापसी प्रक्रिया योजना के मुताबिक चल रही है और अगले छह से सात दिनों में वापसी की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
चीन की सेना ने पिछले वर्ष ‘फिंगर चार’ और ‘फिंगर आठ’ के बीच कई बंकर और अन्य ढांचे बना लिए और फिंगर चार के आगे भारतीय सैनिकों के गश्त पर जाने पर रोक लगा दी थी जिसके बाद भारतीय सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। नौ दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेष रूप से जोर दिया कि चीन की सेना पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर ‘फिंगर चार’ और ‘फिंगर आठ’ के बीच से हटे।