पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव वाले इलाके गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स क्षेत्र में गश्त चौकी-15 (PP-15) से भारत और चीन की सेनाएं वापस लौट गई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दोनों सेनाओं की ओर से सैन्य वापसी की प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है और वर्तमान स्थिति की समीक्षा भी कर ली है।
गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडेय ने कहा था कि गश्त चौकी-15 से सैनिकों की वापसी की समीक्षा की जानी बाकी है।
2020 में बढ़ा था गतिरोध
गौतरलब है कि पांच मई, 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हो गया था। यह झड़प उस वक्त हुई थी जब चीनी सैनिक लद्दाख सेक्टर में भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास कर रहे थे। इसके बाद दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में धीरे-धीरे भारी हथियारों से लैस हजारों सैनिकों की तैनाती कर दी थी। तब से भारत-चीन के सैनिकों को पैट्रोलिंग पॉइंट 15 के पास एक दूसरे के विपरीत तैनात किया गया है। अब भारत और चीन पैंगोंग त्सो लेक के दोनों किनारों से सैनिकों को हटा भी चुके हैं।
आठ सितंबर को शुरू हुई थी सेना वापसी की प्रक्रिया
भारत और चीन के सैनिकों की पीपी-15 से पीछे हटने की प्रक्रिया आठ सितंबर से शुरू हुई थी। हाल ही में चीन की सेना ने घोषणा की थी कि उसने गोगरा-हॉटस्प्रिंग्स पेट्रोलिंग पॉइंट 15 से हटना शुरू कर दिया है, जिसके एक दिन बाद नौ सितंबर को विदेश मंत्रालय की ओर से इस बारे में टिप्पणी की गई थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि समझौते के अनुसार, इस क्षेत्र में वापसी की प्रक्रिया 8 सितंबर को सुबह 8:30 बजे शुरू हुई और 12 सितंबर तक पूरी हो जाएगी।
दोनों सेनाओं के स्थानीय कमांडरों ने की बैठक
पूर्वी लद्दाख की गोगरा-हॉस्प्रिंग क्षेत्र में पेट्रोलिंग पॉइंट-15 से अस्थायी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के बाद संयुक्त रूप से वापसी की प्रक्रिया का वेरीफिकेशन किया गया। इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों ने मंगलवार को कहा कि दोनों पक्षों ने चरणबद्ध तरीके से वापसी की प्रक्रिया को पूरा किया।
पेट्रोलिंग पॉइंट से वापसी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद दोनों सेनाओं के स्थानीय कमांडरों ने एक बैठक की, जहां दोनों पक्ष पिछले दो साल से अधिक समय से गतिरोध में थे। हालांकि डेमचोक और डेपसांग क्षेत्रों में गतिरोध के हल की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।