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भारत-अफगान तालिबान के बीच बातचीत: कैसे PAK-चीन के मुकाबले के लिए अहम है यह मुलाकात, MEA ने क्यों चुना यह समय?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 09 Jan 2025 04:25 PM IST

सार

भारत और अफगान तालिबान की हालिया बैठक में क्या हुआ? भारत और तालिबान ने एक-दूसरे के सामने किन मुद्दों को उठाया? बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच किन मामलों पर सहमति बनी? इस मुलाकात के कूटनीतिक मायने क्या हैं? और भारत के इस जुड़ाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव होगा? आइये जानते हैं...
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भारत अफगान तालिबान के बीच बैठक। - फोटो : अमर उजाला
भारत के पड़ोस में बीते कुछ दिनों से उथल-पुथल जारी है। फिर चाहे वह पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार की बात हो या उत्तर में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की, दक्षिण में श्रीलंका की या पश्चिम में ईरान से लेकर पश्चिमी एशियाई देशों तक। इन हालात के बीच भी भारत की तरफ से अलग-अलग सत्ता के केंद्रों से सामंजस्य बिठाने की कोशिश जारी है। हाल ही में अपने इन्हीं प्रयासों के तहत भारत ने अफगानिस्तान के मौजूदा तालिबान शासन से दुबई में मुलाकात की। दोनों पक्षों की इस मुलाकात की टाइमिंग और चर्चाओं को लेकर कई कयास भी लगने लगे हैं।  

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और अफगान तालिबान की हालिया बैठक में हुआ क्या? भारत और तालिबान ने एक-दूसरे के सामने किन मुद्दों को उठाया? बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच किन मामलों पर सहमति बनी? इस मुलाकात के कूटनीतिक मायने क्या हैं? और भारत के इस जुड़ाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव होगा? आइये जानते हैं...

 
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भारत अफगान तालिबान के बीच बैठक। - फोटो : अमर उजाला
भारत के पड़ोस में बीते कुछ दिनों से उथल-पुथल जारी है। फिर चाहे वह पूर्व में बांग्लादेश और म्यांमार की बात हो या उत्तर में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की, दक्षिण में श्रीलंका की या पश्चिम में ईरान से लेकर पश्चिमी एशियाई देशों तक। इन हालात के बीच भी भारत की तरफ से अलग-अलग सत्ता के केंद्रों से सामंजस्य बिठाने की कोशिश जारी है। हाल ही में अपने इन्हीं प्रयासों के तहत भारत ने अफगानिस्तान के मौजूदा तालिबान शासन से दुबई में मुलाकात की। दोनों पक्षों की इस मुलाकात की टाइमिंग और चर्चाओं को लेकर कई कयास भी लगने लगे हैं।  

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत और अफगान तालिबान की हालिया बैठक में हुआ क्या? भारत और तालिबान ने एक-दूसरे के सामने किन मुद्दों को उठाया? बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच किन मामलों पर सहमति बनी? इस मुलाकात के कूटनीतिक मायने क्या हैं? और भारत के इस जुड़ाव का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव होगा? आइये जानते हैं...
 

पहले जानें- भारत और अफगान तालिबान की ये बैठक खास क्यों?
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मवलावी आमिर खान मुत्ताकी से दुबई में मुलाकात की है। गौरतलब है कि भारत ने आधिकारिक तौर पर अफगान तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है। इसके चलते भारत ने पहले अफगान तालिबान से पर्दे के पीछे रहते हुए कई मुलाकातें की हैं। इन बैठकों में भारत की तरफ से हमेशा संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को भेजा जाता था। हालांकि, अब भारत की तरफ से पहली बार खुले तौर पर अफगान तालिबान के साथ मुलाकात और इसमें विदेश सचिव की मौजूदगी होना दर्शाता है कि भारत अपने इस पड़ोसी देश से रिश्तों को लेकर कितना गंभीर है। 

दोनों पक्षों के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
भारत और अफगानिस्तान के बीच हुई पिछली मुलाकातों को लेकर विदेश मंत्रालय की तरफ से ज्यादा जानकारी सामने नहीं आती थी। लेकिन दुबई में दोनों पक्षों की तरफ से मुलाकात को लेकर बयान भी जारी किया गया है। इन बयानों में भारत और अफगान शासन के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई और किस चीज को लेकर समझौता हुआ, इसकी भी जानकारी दी गई है। 

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत अपने दशकों पुराने मित्र अफगानिस्तान में विकास को नए सिरे से फिर रफ्तार देगा। विदेश सचिव और अफगान तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के बीच अहम बैठक में इस पर सहमति बनी। बैठक में अफगानिस्तान ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को वरीयता देने का आश्वासन दिया और दोनों देशों के बीच क्रिकेट के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

भारत और तालिबान के बीच रिश्तों में बदलाव कैसे शुरू हुआ?
भारत और अफगानिस्तान के बीच अगस्त 2021 से पहले काफी बेहतर रिश्ते रहे थे। दरअसल, यह वह दौर था, जब अफगानिस्तान में एक के बाद चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारें रहीं। हालांकि, अफगानिस्तान से अमेरिका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं के निकलने के बाद जब काबुल पर तालिबान का कब्जा हो गया तो भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में भी अवरोध पैदा हो गया। भारत ने इस दौरान सुरक्षा कारणों से विकास कार्य रोक दिए थे। लेकिन बीच-बीच में मानवीय मदद जारी रखी। 

इस दौरान दोनों देश कूटनीतिक चैनल के माध्यम से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहे। इस क्रम में विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह, जो कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के लिए जिम्मेदार थे, के नेतृत्व में दो बार भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अफगानिस्तान का दौरा किया। जेपी सिंह जब सात नवंबर को प्रतिनिधिमंडल के साथ दूसरी बार अफगानिस्तान पहुंचे तब दोनों देशों के बीच रिश्तों का फिर पटरी पर लौटना शुरू हुआ। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब मुजाहिद और पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की। इसके बाद भारत ने पहली बार अफगानिस्तान के मुंबई काउंसुलेट में इकरामुद्दीन को काउंसुलेट के रूप में मान्यता दी। 

तालिबान के साथ अब क्यों चर्चा कर रहा भारत?
भारत के विदेश सचिव और तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री के बीच यह मुलाकात भारतीय अधिकारियों और अफगान तालिबान के नेताओं के बीच कम से कम चार अनौपचारिक बैठकों के बाद संपन्न हुई है। हालांकि, हालिया बैठक के समय को लेकर काफी चर्चाएं हैं। दरअसल, यह ऐसा समय है, जब अफगानिस्तान का अपने पूर्वी पड़ोसी पाकिस्तान से काफी विवाद चल रहा है। पाकिस्तान की तरफ से आरोप लगाया गया है कि तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) उसके यहां आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और इसके बाद टीटीपी के आतंकी अफगान तालिबान की मदद से पाकिस्तान की सीमा पार कर अफगानिस्तान के क्षेत्र में ही छिप जा रहे हैं। 

अपनी इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें बच्चों-महिलाओं समेत 50 से ज्यादा लोगों की जान जाने की बात सामने आई। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान की इस हरकत को अनुचित कार्रवाई बताया और सीमा से लगे पाकिस्तानी क्षेत्र में चौकियों पर हमले बोले। 

इस पूरी घटना के बीच भारत ने बीते हफ्ते ही पाकिस्तान की तरफ से अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की आलोचना की थी और कहा था कि यहा इस्लामाबाद की पुरानी आदत है कि वह अपनी अंदरूनी नाकामियों के लिए पड़ोसी देशों को जिम्मेदार ठहराता है। यानी भारत ने खुले तौर पर टीटीपी की आंतकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान को ही निशाने पर लिया और अफगानिस्तान के समर्थन में दिखाई दिया। 

अफगान तालिबान ने बैठक के बाद क्या कहा?

भारत और अफगानिस्तान के बीच चर्चा के मायने क्या?
भारत इस पूरे घटनाक्रम पर काफी करीब से नजर रख रहा था और अफगान तालिबान के साथ रिश्तों को बढ़ाने के लिए मौका तलाश रहा था। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हुए इस घटनाक्रम के बाद यह तय हुआ कि अब बिना देरी किए भारत को अफगान तालिबान के साथ ही संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। भारत के लिए इसके पीछे ये बड़ी वजह रहीं- 

अमर उजाला ने भारत की तरफ से अफगान तालिबान से बात शुरू करने के इस पूरे घटनाक्रम पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर संजय कुमार पांडेय से बात की। उन्होंने बताया कि कौटिल्य का मंगल सिद्धांत कहता था कि आपका जो पड़ोसी होता है, वह आपका शत्रु होता है और पड़ोसी का पड़ोसी आपका मित्र होता है। इसी प्रकार उन्होंने एक परिकल्पना की, पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को समझने के लिए। उसके हिसाब से देखा जाए तो पाकिस्तान और भारत के रिश्ते खराब रहे हैं तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान का पड़ोसी यानी अफगानिस्तान हमारा मित्र है। 
 

1. व्यापार-आवाजाही के लिहाज से कैसे अहम है अफगानिस्तान?
प्रोफेसर पांडेय ने बताया कि अफगानिस्तान 1947 तक हमारा सीधा पड़ोसी था। विभाजन के बाद हमारी सीमाएं अलग हुईं, जबकि उससे पहले भारत एक बड़े भूभाग के जरिए मध्य एशिया और पश्चिम एशिया से जुड़ा था। यानी अफगानिस्तान ने हमेशा से एक पुल का काम किया है। अब भी मध्य एशिया और पश्चिमी एशिया में भारत की आसान पहुंच के लिए अफगानिस्तान अहम केंद्र बना हुआ है। इसलिए यहां मौजूद शासन की अहमियत भारत के लिए काफी बढ़ जाती है।

2. भारत के निवेश और रुकी हुई परियोजनाओं के लिए 
2021 में तालिबान के आने से पहले भारत ने तीन अरब डॉलर से ज्यादा की मदद अफगानिस्तान को मुहैया कराई है। वहां की संसद के साथ सड़कें भी बनाई हैं। इसके अलावा भारत के कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी अफगानिस्तान में जारी थे। इसके अलावा 2017 में जब चाबहार का समझौता हुआ था, तब इसका मकसद यही था कि भारत अब पाकिस्तान से हटकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया-पश्चिम एशिया तक अपनी पहुंच और कनेक्टिविटी बना सके। 

3. सुरक्षा हितों के लिहाज से
प्रोफेसर पांडेय के मुताबिक, "अफगानिस्तान की अहमियत हमारी सुरक्षा की दृष्टि से भी है। प्राचीन समय के ग्रीक और मुगलकाल के दौरान भारत पर हुए आक्रमणों की बात हो या बीते वर्षों में आतंकवाद के खतरे की, भारत की सुरक्षा के लिहाज से यह क्षेत्र हमेशा से अहम बना हुआ है। अफगानिस्तान से बेहतर संबंधों के चलते ही पाकिस्तान इस क्षेत्र का इस्तेमाल अपने मंसूबों के लिए नहीं कर पाया है। भारत आगे भी इसी तरह अफगानिस्तान के साथ जुड़कर इन खतरों को दूर ही रखना चाहता है। 

4. कूटनीति के लिहाज से अफगानिस्तान अहम

i). पाकिस्तान के खिलाफ अहम साथी
ऐसा नहीं है कि भारत-अफगान तालिबान के अच्छे रिश्तों का सिर्फ भारत को ही फायदा होगा। प्रोफेसर पांडेय के मुताबिक, चूंकि अफगान तालिबान के पाकिस्तान की सीमा से जुड़े मुद्दे बने हुए हैं। साथ ही अब उसने हमले कर के तालिबान को चुनौती दी है। ऐसे में भारत के साथ अच्छे संबंधों के जरिए तालिबान पाकिस्तान से निपटने में मदद हासिल कर सकता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक और एशिया की बड़ी शक्ति से जुड़ने से उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम देश की मान्यता मिलेगी और इसका असर बाकी देशों पर भी पड़ सकता है। 

दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक अहम पड़ोसी से अच्छे संबंध भारत की भू-राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति के लिए भी बेहतर होंगे। यानी दोनों देशों के लिए अपने पड़ोसी (पाकिस्तान) का सामना करने के लिए यह पारस्परिक सहयोग वाले रिश्ते साबित हो सकते हैं। 

ii). चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते अफगान तालिबान से संपर्क जरूरी
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रो. पांडेय के मुताबिक, अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक सरकार के हटने के बाद से चीन ने तालिबान में अपनी पैठ बढ़ाई है। अफगानिस्तान में चीन के कॉपर समेत कई खदानों में प्रोजेक्ट चल रहे हैं। वहीं, तालिबान के आने के बाद से भारत के अधिकतर प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़े हैं। ऐसे में अब भारत को यह समझ आ रहा है कि उसकी तरफ से अफगानिस्तान की जमीन को खाली छोड़ना कहीं से भी फायदे का सौदा नहीं है, क्योंकि इस स्थिति में चीन अफगानिस्तान में हावी हो सकता है, जो कि भारत की सुरक्षा और निवेशों के लिहाज से ठीक नहीं होगा। 

गौरतलब है कि भारत के लिए अफगानिस्तान, ईरान समेत मध्य एशिया और पश्चिम एशिया तक जाने का सबसे बड़ा जरिया चाबहार बंदरगाह ही है। इसके जरिए वह पाकिस्तान को छोड़कर अफगानिस्तान से भी जुड़ा रहेगा। एक तरह से यह बंदरगाह चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना का जवाब भी बना रहेगा। इन सब लिहाज से यह जरूरी है कि इससे पहले कि चीन इन प्रोजेक्ट्स में भी अवरोध पैदा कर दे और पूरी तरह अफगानिस्तान में काबिज हो जाए, भारत एक बार फिर अफगान तालिबान के साथ संपर्क स्थापित कर, अपने प्रोजेक्टस को आगे बढ़ाए।
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