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रूस-यूक्रेन तनाव : भारत बोला- हम दोनों देशों से संपर्क में, तत्काल तनाव कम करना सभी के हित में

Mon, 31 Jan 2022 10:27 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 10 सदस्यों ने यूक्रेन सीमा पर रूस की आक्रामकता को लेकर चर्चा करने के पक्ष में वोट किया। 
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब
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विस्तार
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस-यूक्रेन तनाव के मुद्दे पर चर्चा की मांग वाले मतदान में हिस्सा नहीं लिया है। दरअसल, यूएनएससी में प्रस्ताव लाया गया है, जिसके जरिए यूक्रेन की सीमा के हालात पर चर्चा की मांग की गई। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस-यूक्रेन तनाव के मुद्दे पर चर्चा की मांग वाले मतदान में हिस्सा नहीं लिया है। दरअसल, यूएनएससी में प्रस्ताव लाया गया है, जिसके जरिए यूक्रेन की सीमा के हालात पर चर्चा की मांग की गई। इस प्रस्ताव को यूएनएससी के 10 देशों की ओर से समर्थन मिला, जिसके बाद मुद्दे पर बैठक हुई। 

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यूएनएससी में क्या बोला भारत?
संयुक्त राष्ट्र में बैठक के दौरान यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, "सभी का हित तनाव के कम हो जाने में है। हम दोनों ही पक्षों से लगातार संपर्क में बने हुए हैं।" उन्होंने कहा, "हम मिंस्क और नोर्मैंडी समझौते का स्वागत करते हैं। हम जुलाई 2020 को दोनों देशों के बीच सीजफायर के तौर पर पहचान दिए जाने के कदम का भी स्वागत करते हैं। इसके साथ ही हम बर्लिन में दो हफ्ते में दोनों देशों की बैठक का भी स्वागत करते हैं।"

क्या रहा यूएनएससी में वोटिंग का रुख?
भारत के साथ इस वोटिंग में केन्या और गैबोन भी हिस्सा नहीं लिया। उधर चीन और रूस ने इस बैठक के विरोध में वोट किया। हालांकि, परिषद के 10 सदस्यों ने यूक्रेन सीमा पर रूस की आक्रामकता को लेकर चर्चा करने के पक्ष में वोट किया।  बताया गया है कि जिन देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, उनमें नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, आयरलैंड, ब्राजील और मैक्सिको शामिल हैं। प्रस्ताव पर चर्चा के लिए परिषद के नौ सदस्यों की सहमति की जरूरत थी और 10 देशों के समर्थन के बाद बैठक का रास्ता भी साफ हो गया। 
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इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस-यूक्रेन तनाव को लेकर फिर चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि अगर रूस बातचीत के माध्यम से हमारी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है तो अमेरिका और हमारे सहयोगी देश इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे। यदि इसके बजाय रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

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