आजादी की लड़ाई जीत का इंतजार कर रही थी। तभी महज कुछ दिनों की नौकरी पर लगभग गुमनाम सा एक शख्स भारत आया। जमीन पर उसने रेखाएं खींचीं। देखते ही देखते दुनिया का भूगोल बदल गया और जब-जब बात उठती है, विवाद होता है, इतिहास उस शख्स को ढूंढता है।
सिरिल जॉन रैडक्लिफ को भारत और पाकिस्तान के मध्य सीमा रेखा खींचने का दायित्व सौंपा गया था। जिस दिन भारत और पाकिस्तान स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आए, उस दिन दोनों देशों और उनके नेताओं को यह भी मालूम नहीं था कि उनकी सीमाएं कहां हैं? स्वतंत्र पाकिस्तान 14 अगस्त को अस्तित्व में आ गया था।
15 अगस्त को लाल किले पर तिरंगा फहरा। मगर दोनों देशों के बीच सीमा रेखा एक दिन बाद 16 अगस्त को ही खींची जा सकी। यानी आजादी पहले मिल गई, सीमाएं बाद में तय हुईं। रैडक्लिफ इससे पहले कभी भारत नहीं आए थे और दो देशों के बीच विभाजन रेखा को खींचना आसान काम नहीं था।
कोई भी रेखा, सड़क तंत्र, रेल तंत्र, संचार तंत्र, सिंचाई तंत्र और बिजली तंत्र को तहस-नहस किए बिना मुमकिन नहीं थी। खेतों की स्थिति भी यही थी। इस सारी कवायद के लिए दो सीमा आयोग गठित हुए थे। एक बंगाल के लिए और दूसरा पंजाब के लिए। दोनों का ही अध्यक्ष सर सिरिल रैडक्लिफ को बनाया गया।
रैडक्लिफ 8 जुलाई, 1947 को पहली बार भारत पहुंचे थे। उन्हें अपने समूचे कार्य के लिए 5 सप्ताह का नपा-तुला समय दिया गया। रैडक्लिफ को सिर्फ इस बात की संतुष्टि थी कि उनके निजी सचिव क्रिस्टोफर ब्यूमेंट पंजाब की हर स्थिति से पूरी तरह वाकिफ थे। तब ऐसे अनेक मंजर सामने आए, जब किसी एक गांव को बीच में से बांटना पड़ा।
एक गांव का कुछ भाग पाकिस्तान को मिला, शेष हिंदुस्तान को। रैडक्लिफ घनी आबादी वाले क्षेत्रों के बीच विभाजक रेखा के हक में थे, मगर इससे कई ऐसे घर भी बंटे, जिनके कुछ कमरे भारत में गए, कुछ पाकिस्तान में। समूची विभाजक कार्यवाही यथासंभव गुप्त रखी गई। अंतिम रपट (अवार्ड) 9 अगस्त, 1947 को तैयार हो गई थी, मगर उसे विभाजन से दो दिन बाद 17 अगस्त को ही सार्वजनिक किया गया।
रैडक्लिफ की उम्र उस समय सिर्फ 48 वर्ष थी। 17 अगस्त को ही वह वापस लौट गए। स्वदेश वापसी पर उन्हें 'लॉ-लॉर्ड' का पद दिया गया। उन्हें सरकारी सम्मान मिलते रहे। 1977 में एक 'विस्काउंट' के रूप में उन्होंने आखिरी सांस ली। उन्हें शायद जीते-जी इस बात का अहसास नहीं था कि सिर्फ छह सप्ताहों की नौकरी उन्हें भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पृष्ठ दे डालेगी।