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जो लौटकर घर न आए: सीमा पर गए भारत मां के लाल गलवां घाटी में हुए शहीद, देश कर रहा याद

Fri, 14 Aug 2020 09:24 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संतोष बाबू - फोटो : अमर उजाला
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देश 15 अगस्त को 74वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। कोरोना संकट के चलते इस साल के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में पहले की तरह होने वाली धूम-धाम में कमी देखी जाएगी। वहीं, आजादी के इस पावन मौके पर देश उन शहीद जवानों को याद कर रहा है, जो भारत माता की सुरक्षा के लिए सीमा पर गए तो सही, लेकिन फिर कभी वापस घर लौटकर नहीं आए। 

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देश के इन वीर जवानों ने दुश्मन के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देते हुए उसके नापाक मंसूबों पर पानी फेरा, लेकिन इसके लिए बहादुर सैनिकों को अपनी जान की बाजी लगानी पड़ी। ऐसी ही एक घटना इस साल 15 जून को घटी, जब चीन अपने विस्तारवादी रवैये को दिखाते हुए पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में घुसने की कोशिश करने लगा। 


इस दौरान, बहादुर जवानों ने चीनी सैनिकों को सीमा में घुसने से रोका, जिस पर दोनों ही पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग अधिकारी कर्नल बी संतोष बाबू समेत 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए। वहीं, इस घटना में चीनी पक्ष के 43 के करीब जवान शहीद हुए। 
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यह भी पढ़ें: 15 जून की रात... गलवां घाटी में भारतीय सेना ने बायोनट फाइट से चीनी खेमे में मचाई थी तबाही

जवानों की शहादत के बाद पूरे भारत में चीन के खिलाफ गुस्सा देखा गया और देश के विभिन्न शहरों में 'ड्रैगन' के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए। भारत ने इस हिंसक झड़प को चीन सेना की सोची-समझी और पूर्वनियोजित कार्रवाई बताया था।

इस हिंसक झड़प में सबसे ज्यादा 16 बिहार रेजिमेंट के जवान शहीद हुए थे। 16 बिहार रेजिमेंट से शहीद हुए जवानों की संख्या 12 थी। वहीं, 3 पंजाब रेजिमेंट के तीन, 3 मीडियम रेजिमेंट के दो, 12 बिहार रेजिमेंट का एक, 81 माउंट बिग्रेड सिग्नल कंपनी का एक और 81 फील्ड रेजिमेंट का एक जवान भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हुआ था। 

वहीं, सरकार ने फैसला किया कि इस हिंसक झड़प में शहीद हुए जवानों को याद करने के लिए इनके नाम दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित किए जाएंगे। अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि स्मारक पर सैन्य कर्मियों के नामों को उकेरे जाने की प्रक्रिया में कुछ महीने लगेंगे। 
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दूसरी तरफ, पूर्वी लद्दाख में 17 जुलाई को लुकुंग अग्रिम चौकी के दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अद्भुत शौर्य और वीरता दिखाने के लिए बिहार रेजिमेंट के सैनिकों की सराहना की थी। रक्षा मंत्री ने कहा था कि शहीद हुए भारतीय सैनिकों ने न केवल अद्भुत शौर्य का परिचय दिया बल्कि 130 करोड़ भारतीयों के गौरव की भी रक्षा की। 

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