संघर्ष विराम पर मनोज नरवणे की प्रतिक्रिया
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भविष्य में कोई और मौका नहीं है- मनोज नरवणे
भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज एम नरवणे ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा- जमीन, समंदर और हवाई सैन्य अभियानों का बंद होना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है। हालांकि हमें स्थायी दीर्घकालिक समाधान तक पहुंचने के लिए अन्य मोर्चों पर दबाव बनाए रखना चाहिए। हम घटना आधारित प्रतिक्रिया नहीं कर सकते और आतंकी हमलों में जान नहीं गंवा सकते। यह तीसरा हमला है, भविष्य में कोई और मौका नहीं है।
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संघर्ष विराम पर वीपी मलिक की प्रतिक्रिया
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भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख वेद मलिक का सवाल
वहीं भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख वेद मलिक ने भी अपने एक्स हैंडल पर किए गए एक पोस्ट में लिखा- युद्ध विराम 10 मई 25: हमने भारत के भविष्य के इतिहास को यह पूछने के लिए छोड़ दिया है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तानी भीषण आतंकी हमले के बाद उसकी कार्रवाइयों से क्या राजनीतिक-रणनीतिक लाभ, यदि कोई हो, हासिल हुआ।
संघर्ष विराम पर रक्षा विश्लेषक ब्रह्म चेलानी की प्रतिक्रिया
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'जीत के मुंह से हार छीनना भारत के राजनीति की परंपरा'
वहीं इस पर रक्षा विश्लेषक ब्रह्मा चेलानी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जीत के मुंह से हार छीनना लंबे समय से भारतीय राजनीतिक परंपरा रही है। अपने एक्स हैंडल पर उन्होंने कुछ उदाहरण भी साझा किए हैं।
- 1948: भारत जम्मू और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाता है और फिर जब भारतीय सेना जीत की ओर बढ़ रही होती है, तो युद्ध विराम पर सहमत हो जाता है।
- 1954: बिना किसी बदले के, भारत तिब्बत में अपने अतिरिक्त क्षेत्रीय अधिकारों को छोड़ देता है और 'चीन के तिब्बत क्षेत्र' को मान्यता देता है।
- 1960: भारत ने सिंधु बेसिन के पानी के चार-पांचवें हिस्से को अपने दुश्मन पाकिस्तान के लिए सुरक्षित रखने के लिए एक संधि पर हस्ताक्षर किए।
- 1966: भारत ने 1965 के युद्ध की शुरुआत करने वाले पाकिस्तान को अत्यधिक रणनीतिक हाजी पीर लौटा दिया, जो बाद में पाकिस्तान के लिए भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ करने का लॉन्चपैड बन गया।
- 1972: शिमला में, भारत ने पाकिस्तान से बदले में कुछ भी हासिल किए बिना वार्ता की मेज पर अपने युद्ध लाभ को दे दिया।
- 2021: चीन की तरफ से लद्दाख की प्रमुख सीमा पर 2020 में किए गए गुप्त अतिक्रमण के बाद, भारत ने रणनीतिक कैलाश हाइट्स को खाली कर दिया, ये पहाड़ियां इतनी अहम थीं कि भारत के पास चीन से बातचीत में दबाव बनाने का एकमात्र मजबूत कार्ड थीं और फिर लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में चीन की तरफ से डिजाइन किए गए 'बफर जोन' पर सहमति व्यक्त की।
- 2025: आतंकवादी प्रॉक्सी के माध्यम से पाकिस्तान के चार दशक लंबे 'हजारों घावों वाले युद्ध' को समाप्त करने के लिए, भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, लेकिन बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य को हासिल किए इसे तीन दिन बाद ही रोक दिया गया।
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों बदले हालात?
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में कुल नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया था। इस कार्रवाई में कई कुख्यात आतंकी भी मारे गए हैं। इसके बाद से पाकिस्तान ने सीमा पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन किया और भारत के कई शहरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसके बाद भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। जिसके बाद भारतीय की ताबड़तोड़ कार्रवाई और वैश्विक दवाब के कारण पाकिस्तान ने भारत के सामने संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा। जिसे दोनों देशों ने चर्चा के बाद लागू किया। हालांकि, पाकिस्तान ने कुछ ही घंटे बाद इस संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और सीमा पार से गोली और ड्रोन के जरिए हमले भी किए थे।