मिशन रफ्तार के तहत रेलवे का पूरा ध्यान इन दिनों ट्रेनों की गति बढ़ाने पर है। जिन स्टेशनों पर भारी ट्रैफिक है वहां जाम की समस्या खत्म की जाएगी। गति बढ़ाने के लिए पैसेंजर ट्रेनों को मेमू ट्रेनों में बदला जाएगा। मालगाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए दो इंजनों के इस्तेमाल की योजना है।
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष एके मित्तल ने बताया कि मिशन रफ्तार के लिए रेलवे ने अलग से ‘मोबिलिटी डायरेक्टोरेट’ का गठन किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की गति बढ़ाना है। इसके लिए कॉरीडोर का सर्वे किया जा रहा है। इलाहाबाद, कानपुर, गाजियाबाद, मुगलसराय में भारी ट्रैफिक की समस्या को खत्म करने पर रेलवे का ध्यान है। रेलवे का मानना है कि इन स्टेशनों पर ट्रेनों को पास करने में कम से कम 20-30 मिनट तक लग जाते हैं। ऐसे स्टेशनों पर ट्रेनों के इंजन नहीं बदले जाने की योजना है। इससे 20-30 मिनट का समय बच जाएगा।
बोर्ड अध्यक्ष के अनुसार 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से ट्रेनों को चलाने के लिए कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसे पूरी तरह इलेक्ट्रिक रूट बनाया जा रहा है। सबसे पहला कॉरीडोर दिल्ली-इलाहाबाद के लिए तैयार किया गया है। पैसेंजर ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए लोको को मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू) व डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डेमू) में बदल दिया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष की मानें तो एक जुलाई से लागू होने वाले रेलवे के टाइम टेबल में भारी बदलाव देखने को मिलेगा। गति बढ़ाने के क्रम में ट्रेनों की समय-सारणी भी बदल जाएगी।