रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी से दुनियाभर के उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता प्रभावित होगी। भारत में भी 63 फीसदी उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता घट जाएगी। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ)-इप्सॉस के सर्वे के मुताबिक, 28% लोगों ने ऊर्जा के दाम बढ़ने के लिए तेल एवं गैस बाजारों में उतार-चढ़ाव को जिम्मेदार बताया है। 25 फीसदी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव से दाम बढ़ रहे हैं, जबकि 18 फीसदी ने मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
सर्वे में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ताओं ने अपर्याप्त आपूर्ति को दाम बढ़ने का सबसे बड़ा कारण बताया। सर्वे 30 देशों के 22,534 उपभोक्ताओं से बातचीत पर आधारित है।
यहां के 55 फीसदी उपभोक्ताओं का मानना है कि ऊर्जा के दाम बढ़ने से उनके कुल खर्च पर असर पड़ेगा। दक्षिण अफ्रीका के 77 फीसदी, जापान एवं तुर्की के 69 फीसदी, स्विट्जरलैंड एवं नीदरलैंड में 37 फीसदी उपभोक्ताओं की भी यही राय है। सिर्फ 13% ने जलवायु नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
nयूक्रेन संकट का जीडीपी पर असर का आकलन जल्दबाजी
राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के निदेशक पिनाकी चक्रवर्ती ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आर्थिक अनिश्चितताएं बढ़ी हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में अभी अनुमान लगाना जल्दबाजी होगा।
उन्होंने बुधवार को कहा कि उच्च आवृत्ति के आंकड़ों से पता चलता है कि कई देशों में महंगाई अधिक है। हालांकि, भारत की मौजूदा वृहद आर्थिक स्थिति निश्चित रूप से पहले की तुलना में बेहतर है। हालांकि, देश को सतर्क रहने की जरूरत है।
इस हफ्ते दोगुने से ज्यादा बढ़ सकते हैं गैस के दाम
गैस उत्पादक कंपनियों के लिए यह सप्ताह अच्छा रह सकता है। इस दौरान गैस की कीमतें दोगुनी से ज्यादा बढ़ सकती हैं। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) को मुंबई हाई और अन्य क्षेत्रों के लिए दोगुना से ज्यादा कीमत मिल सकती है। रिलायंस को केजी बेसिन गैस के लिए 10 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट की दर से भाव मिलने की संभावना है। इससे आने वाले समय में रसोई गैस और सीएनजी की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- अप्रैल, 2019 के बाद यह दूसरी बार है, जब दाम बढ़ेंगे। यह बढ़त ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक बाजार तेजी में हैं। सरकार देश में बनने वाली प्राकृतिक गैस के दाम की समीक्षा एक अप्रैल को करने वाली है। सरकार हर छह महीने में कीमतों की समीक्षा करती है।
- ओएनजीसी को अभी फील्डों से उत्पादित गैस 2.9 डॉलर के भाव से मिल रहा है, जिसके बढ़कर 5.93 डॉलर होने की संभावना है। यह अब तक की सबसे ऊंची दर है। केजी क्षेत्रों को कठिन फील्ड की श्रेणी में रख गया है।