क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यूरोपीय बाजार समेत दुनिया के अन्य हिस्सों में इस समय दूध पाउडर की मांग बढ़ रही है। यूरोप में पिछले साल करीब तीन लाख टन एसएमपी का स्टॉक था, जो कि इस समय गिरकर 70 हजार टन तक आ गया है। मतलब यूरोपीय देशों में इसके निर्यात की संभावना बेहतर होती दिख रही है।
उधर चीन में भी बीते दो महीने में दूध पाउडर का आयात पांच फीसदी बढ़ा है। साथ ही ईरान के कृषि मंत्रालय ने भी पिछले सप्ताह ही दूध पाउडर के आयात पर लगे प्रतिबंध को कुछ शर्तों के साथ उठा लिया है। इसलिए उम्मीद है कि भारतीय एसएमपी निर्यातकों के लिए बाहर पांव जमाने का यह बेहतर अवसर होगा। केंद्र और राज्य से मिल रही वित्तीय सहायता से निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बेहतर हो सकेगी।