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यूपी : सपा-बसपा गठबंधन से अलग चुनाव लड़कर कांग्रेस दोहराएगी 2009 के परिणाम?

Wed, 16 Jan 2019 08:49 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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congress - फोटो : PTI
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भाजपा को हारने के लिए पूरा विपक्ष साथ आने की कोशिश कर रहा है। क्रिकेट के शब्दों में कहें तो चुनाव बाद टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए हर पार्टी अपनी ताकत झोंक रही है। 1960 और 1980 की तरह गठबंधन बनाने की कोशिश हो रही है। अंतर केवल इतना है कि उस वक्त के जनसंघ के जगह आज कांग्रेस पार्टी है और तब की कांग्रेस की जगह भाजपा।

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कांग्रेस के वोट शेयर में कमी, भाजपा का उदय और क्षेत्रीय दलों के प्रभुत्व ने इस लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) का गठबंधन भी इसी का नतीजा है। क्षेत्रीय दल एक दूसरे के साथ उस स्थिति में आने की कोशिश में हैं जहां कांग्रेस को अन्य के रूप में देखा जाने लगे।

इसी को भांपते हुए कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर लड़ने का एलान कर दिया है। 

सपा-बसपा के गठबंधन के आधिकारिक घोषणा से पहले कांग्रेस के नेताओं को यह उम्मीद थी कि मायावती और अखिलेश यादव उन्हें सम्मानजनक सीटें देंगे। माना जा रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को दस फीसदी आरक्षण के बाद लगभग 30 सीटों पर दिलचस्प मुकाबला हो सकता है। विपक्ष के कई लोग मानते हैं कि महागठबंधन से होने से कांग्रेस सवर्ण वोटों को लेकर मायावती-अखिलेश के गठबंधन के खिलाफ भाजपा के काम आ सकती है।
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सपा और बसपा ने 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। गठबंधन ने कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी की दो सीटें छोड़ दी है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस केवल इन्हीं सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी।

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2009 में कांग्रेस ने किया था कमाल

जबकि कांग्रेस का मानना है कि गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की तरह किसान और नौजवान के नारे के साथ वह यहां भी कमाल कर सकती है। कुल मिलाकर केंद्र में सरकार बनाने की यह लड़ाई प्रदेश में त्रिकोणीय होती दिख रही है। 2009 में भी ऐसा ही त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था तब कांग्रेस पार्टी ने 21, सपा ने 23 और बसपा ने 20 सीटों पर जीत पाई थी। भाजपा केवल 10 सीटों पर ही सिमट गई थी।

कांग्रेस ने दिसंबर 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणामों में सभी चुनावी पंडितों को चौंका दिया था। कांग्रेस ने इस चुनाव में 77 सीटें हासिल की थी। हाल के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को शिकस्त देने के बाद कांग्रेस पार्टी का हौसला बढ़ा हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार यह कह रहे हैं कि कांग्रेस को कम समझना एक भूल होगी और पार्टी चुनाव के बाद सबको चौंका सकती है। खैर, यह दावा कितना सही है यह तो चुनाव के परिणाम ही बताएंगे।
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