गेट व मंच पर कर्मभूमि और जन्मभूमि की झलक
कौथिग फाउंडेशन ने इस बार मंच को गांव को संवारें की थीम पर तैयार किया है, जिसके माध्यम से पलायन के कारण खंडहर हो चुके पुराने घर और खाली हो चुके गांवों पर प्रवासियों का ध्यान दिलाने की कोशिश की गई है। कौथिग मैदान में मुख्य प्रवेशद्वार पर मुंबई के प्रतीक गेट वे आफ इंडिया की प्रतिकृति बनाई गई है लेकिन, सामने बना मंच गांव के घर जैसा दिखेगा। मंच और प्रवेश द्वार में कर्मभूमि और जन्मभूमि को समाहित किया गया है।
पहाड़ के खाद्य उत्पादों से सजे स्टाल
कौथिग महोत्सव में इस बार भी बड़ी मात्रा में उद्योग निदेशालय, कृषि विभाग और अन्य संस्थाओं ने अपने स्टॉल लगाए हैं जहां पहाड़ी उत्पादों को बिक्री के लिए रखा है। पहाड़ का माल्टा, बुरांश-खुमानी, पुदीना और शुद्ध जूस जैसे कई पेय पदार्थों के स्टाल भी मेले में लगे हैं। पहाड़ की खेती में पैदा होने वाले सैकड़ों खाद्य उत्पाद कोदा-झंगोरा, राजमा, गहथ, भट्ट, भंगजीर आदि इस बार काफी मात्रा में कौथिग महोत्सव में उपल्बध है। कौथिग में पहाड़ के अनोखे हस्तशिल्प के भी कई स्टाल लग रहे हैं।