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मुंबई में ‘जय बद्री केदारनाथ’ की प्रस्तुति के साथ हुआ कौथिग-2018 महोत्सव का आगाज

Sat, 20 Jan 2018 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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नवी मुंबई में प्रवासी उत्तराखंडियों के सामाजिक संगठन कौथिग फाउंडेशन द्वारा आयोजित कौथिग 2018 महोत्सव का भव्य आगाज हुआ। शुक्रवार की शाम सात बजे रामलीला मैदान में कौथिग 2018 का उद्घाटन हुआ। उसके बाद कौथिग मंच पर 11 साल की पहली प्रस्तुति लोकप्रिय गायक सुरेश काला के जय बद्री केदारनाथ की हुई। इससे पहले कौथिग की शुरुआत मां नंदादेवी राजजात की शोभायात्रा निकाली गई। मां नंदादेवी राजजात की शोभा यात्रा नवी मुंबई के नेरूल स्थित गांवदेवी मंदिर से प्रारंभ हुई। शोभा यात्रा में छलिया कलाकारों के पथ नृत्य, ढोल-नगाड़ों, रणसिंगा की गूंज से नेरूल का कौथिग प्रांगण गुंजायमान हो उठा।

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पिथौरागढ़ से आए मशहूर छलिया कलाकारों ने रंगा-रंग पथनृत्य कर दर्शकों की वाहवाही बटोरी। महोत्सव की शुरुआत में जय बद्री केदारनाथ की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद उत्तराखंड संस्कृति विभाग से आए हेमंत बुटोला की टीम ने मां नन्दा पर आधारित प्रस्तुति से दर्शकों की तालियां बटोरी। बुटोला की यह टीम राजपथ पर भी उत्तराखंड की कला को प्रस्तुत कर सम्मानित हो चुकी है। कौथिग महोत्सव में गढ़वाली, जौनसारी और कुमाऊनी कलाकारों के लगभग 200 कलाकार लगातार 10 दिन अपनी प्रस्तुति देंगे।

महोत्सव का उद्घाटन भवन निर्माता माधवानंद भट्ट, एलआईसी के वरिष्ठ व्यवसाय सहयोगी मिलिंद एस गुरव, कौथिग फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. योगेश्वर शर्मा धस्माना व अध्यक्ष हीरा सिंह भाकुनी ने किया। कौथिग फाउंडेशन के अध्यक्ष हीरासिंह भाकुनी ने महोत्सव में भारी संख्या में लोगों के आने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रवासी मुंबई में अपना मुकाम हासिल कर चुके हैं और आगामी दस साल में देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में उत्तराखंड समाज के कई कॉलेज, इंस्टीट्यूट नजर आने चाहिए। 
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इस दौरान कौथिग फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील कुमार जोशी, कौथिग के संयोजक व वरिष्ठ पत्रकार केशर सिंह बिष्ट, महासचिव तरुण चौहान, वासुदेव सेमवाल, सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। नवी मुंबई में 28 जनवरी तक चलने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों के सांस्कृति उत्सव कौथिग के 11वें साल को इस बार उत्तराखंड की महान विभूतियों को समर्पित किया गया है। लोक गायक चंद्रसिंह राही, जनकवि व गायक गिरीश तिवारी गिर्दा, कार्टूनिस्ट बी मोहन नेगी, इतिहासकार शेर सिंह पांगती, फोटोग्राफर कमल जोशी और लेखक रतन सिंह जौनसारी के अलावा मुंबई से प्रवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को नए आयाम देने वाले स्वर्गीय डी राम, अर्जुनसिंह गुसाईं, भगतसिंह शाह, गौरीदत्त बिनवाल, देवी बिष्ट आदि के नाम प्रमुख हैं।

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गेट व मंच पर कर्मभूमि और जन्मभूमि की झलक

गेट व मंच पर कर्मभूमि और जन्मभूमि की झलक

कौथिग फाउंडेशन ने इस बार मंच को गांव को संवारें की थीम पर तैयार किया है, जिसके माध्यम से पलायन के कारण खंडहर हो चुके पुराने घर और खाली हो चुके गांवों पर प्रवासियों का ध्यान दिलाने की कोशिश की गई है। कौथिग मैदान में मुख्य प्रवेशद्वार पर मुंबई के प्रतीक गेट वे आफ इंडिया की प्रतिकृति बनाई गई है लेकिन, सामने बना मंच गांव के घर जैसा दिखेगा। मंच और प्रवेश द्वार में कर्मभूमि और जन्मभूमि को समाहित किया गया है।

पहाड़ के खाद्य उत्पादों से सजे स्टाल

कौथिग महोत्सव में इस बार भी बड़ी मात्रा में उद्योग निदेशालय, कृषि विभाग और अन्य संस्थाओं ने अपने स्टॉल लगाए हैं जहां पहाड़ी उत्पादों को बिक्री के लिए रखा है। पहाड़ का माल्टा, बुरांश-खुमानी, पुदीना और शुद्ध जूस जैसे कई पेय पदार्थों के स्टाल भी मेले में लगे हैं। पहाड़ की खेती में पैदा होने वाले सैकड़ों खाद्य उत्पाद कोदा-झंगोरा, राजमा, गहथ, भट्ट, भंगजीर आदि इस बार काफी मात्रा में कौथिग महोत्सव में उपल्बध है। कौथिग में पहाड़ के अनोखे हस्तशिल्प के भी कई स्टाल लग रहे हैं। 
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