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गजट अधिसूचना से जम्मू-कश्मीर में कई मामलों में जुर्माना राशि दोगुनी से सौगुनी तक हुई

Thu, 02 Apr 2020 10:16 AM IST
Rohit Ojha जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 

सार

  • कैंपिंग एंड मूरिंगः जुर्माना राशि 500 से बढ़कर 50 हजार
  • सरकारी जगह पर अपना कब्जा जमानाः पांच हजार के बजाए अब 50 हजार जुर्माना
  • जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों पर भारी जुर्मानाः 5 नहीं 50 हजार
  • प्राचीन स्मारकों के आसपास बिना परमिट माइनिंग जैसी गतिविधि पर 20 के बजाए 50 हजार जुर्माना
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फाइल फोटो - फोटो : ani
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 खत्म करने के करीब आठ माह बाद नए जम्मू-कश्मीर की गजट अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें कई तरह के नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। इनमें जुर्माने वाले प्रावधानों को देखें तो पता चलता है कि कई तरह की गलतियों पर पहले के मुकाबले दोगुने से लेकर सौ गुने तक जुर्माना लगेगा। जुर्माने की राशि अधिकतर मामलों में बढ़कर पचास हजार रुपए हो गई है।

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जम्मू-कश्मीर में कैंपिंग एंड मूरिंग एक्ट में दी गई जुर्माना राशि में बदलाव किया गया है। पांच मार्च 2004 को केंद्र सरकार की गजट अधिसूचना के अनुसार इस एक्ट के सेक्शन 3 और 4 में दिए गए नियमों का अगर उल्लंघन होता है तो उस बाबत पचास हजार रुपए जुर्माना देना होगा।

सेक्शन 3 में लिखा है कि डायरेक्टर विजिटर ब्यूरो की इजाजत के बिना जम्मू-कश्मीर के किसी भी स्थल पर कोई व्यक्ति अधिकार नहीं जमा सकता। अनुच्छेद 370 के दौरान इस तरह के उल्लंघन में पांच सौ रुपए का जुर्माना या जितने दिन वह उल्लंघन हुआ है, उतने दिन के हिसाब से रोजाना के पचास रुपये देने का प्रावधान था।
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जम्मू-कश्मीर सरकारी स्थान (अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम' 1988 के सेक्शन 14 में कहा गया है कि कोई व्यक्ति सरकारी जगह पर अपना कब्जा जमा लेता है तो पांच हजार रुपये तक जुर्माना या छह माह तक की सजा या दोनों का प्रावधान था। अब जुर्माना बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दिया गया है।

जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वालों पर भारी जुर्माना
जम्मू-कश्मीर नॉन बायोडीग्रेडेबल मटिरियल 'मेनेजमेंट, हैंडलिंग एंड डिस्पोजल' एक्ट की धारा 10 के नियमों में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर जल संसाधन (विनिमय और प्रबंध) अधिनियम में कहा गया है कि जल संसाधनों जैसे, झील, नदियां या आर्द्र भूमि या दूसरी तरह की जल श्रेणियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर भारी जुर्माना लगेगा।

पहले इस एक्ट में उल्लंघन होने पर पांच हजार रुपए देने पड़ते थे, अब वह राशि बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण संरक्षण के चलते अब ईंट निर्माण करने वालों के लिए यूनियन टेरेटरी स्टेट पोल्यूशन कंट्रोल कमेटी का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर यह काम बंजर भूमि पर होता है तो इसके लिए जिला कृषि अधिकारी का सर्टिफिकेट लेना जरुरी होगा।

इसकी लाइसेंस फ़ीस भी बढ़ा दी गई है। पहले यह फीस 30 हजार रुपये थी, अब पचास हजार रुपये कर दी गई है। जम्मू-कश्मीर प्राचीन संस्मारक परिरक्षण अधिनियम की धारा 10 ए के सब सेक्शन 3 के तहत यदि कोई व्यक्ति या संस्था ऐसे किसी स्थल के आसपास माइनिंग जैसी कोई गतिविधि बिना परमिट के करती है तो उस पर जुर्माना किए जाने का नियम है। पहले यह जुर्माना 20 हजार रुपये था, अब उसे बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दिया गया है।

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