गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार देश की तीनों सेनाओं ने संयुक्त झांकी प्रदर्शित की। इस झांकी के जरिए तीनों सशस्त्र सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल और एकजुटता को दिखाया गया। इस झांकी में युद्ध के मैदान को दर्शाया गया, जिसमें स्वदेशी युद्धक टैंक अर्जुन, लड़ाकू विमान तेजस एमकेआईआई, उन्नत हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर्स, विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम और जमीन, हवा और समुद्र में समन्वय के साथ संचालित ऑपरेशन को दर्शाया गया।
तीनों सेनाओं के समन्वित ऑपरेशन की दिखाई झलक
तीनों सेनाओं की इस संयुक्त झांकी का विषय 'सशक्त और सुरक्षित भारत' था। 1 जनवरी को ही रक्षा मंत्रालय ने साल 2025 को रक्षा सुधारों का वर्ष घोषित किया है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए तीनों सेनाओं के बीच के तालमेल को बढ़ावा देने पर फोकस किया जाएगा। तीनों सेनाओं की झांकी में भी सशस्त्र बलों में एकजुटता और एकीकरण को दिखाया गया, जिसमें सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच नेटवर्किंग और संचार के एक संयुक्त संचालन कक्ष का भी प्रदर्शन किया गया। तीनों सेनाओं में एकीकरण का उद्देश्य समकालीन और भविष्य के संघर्षों में सेना की युद्ध क्षमता को बेहतर बनाना है।
थिएटर कमांड के काम में लाई जा रही तेजी
तीनों सेनाओं में तालमेल बेहतर करने के लिए सरकार इसी साल एकीकृत थिएटर कमांड स्थापित करने पर विचार कर रही है। थिएटर कमांड के तहत थल सेना, वायु सेना और नौसेना की क्षमताओं का एकीकरण किया जाएगा और तीनों सेनाएं एक ही कमांड के तहत काम करेंगी ताकि युद्ध के दौरान तीनों की क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके। अभी सेना, नौसेना और वायु सेना की अलग-अलग कमांड हैं, लेकिन थिएटराइजेशन के तहत थिएटर कमांड में तीनों सेनाओं की इकाइयां होंगी और वे एक भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एकजुट होकर काम करेंगी। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र के लिए अलग-अलग थिएटर कमांड होंगी।