सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा के घर के बाहर से गुरुवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो के चार सदस्यों को हिरासत में लिया गया था। इससे एक बार फिर से जासूसी के आरोप लगने शुरू हो गए हैं। हालांकि गृह मंत्रालय ने यह साफ किया है कि चारों शख्स अपनी नियमित ड्यूटी पर थे। उन्हें अति सुरक्षित क्षेत्र जनपथ से पकड़ा गया था। वैसे यह पहली बार नहीं था जब जनपथ ने इस तरह का दृश्य देखा हो। 27 साल पहले भी जासूसी का मुद्दा उठा था। मार्च 1991 में हरियाणा के दो पुलिसवाले तत्कालीन विपक्षी नेता राजीव गांधी के 10 जनपथ स्थित घर के बाहर चाय पीते हुए दिखाई दिए थे। इसके कारण चंद्र शेखर सरकार गिर गई थी।
कांग्रेस का आरोप था कि सादे कपड़ों में खड़े पुलिसवाले हरियाणा सीआईडी से ताल्लुक रखते थे जो राजीव गांधी की
जासूसी कर रहे थे। इससे रिश्तों में खटास पड़ गई और कांग्रेस ने फैसला लिया कि वह चंद्र शेखर सरकार के खिलाफ लोकसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी। यह सब तब शुरू हुआ जब राजीव गांधी की मदद से चंद्र शेखर प्रधानमंत्री बने थे। उस समय कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन सरकार में नहीं थी। 1989 के लोकसभा चुनाव बोफोर्स घोटाला, विश्वनाथ प्रताप सिंह के विद्रोह और पंजाब में आतंकवाद के साए के बीच हुए थे। जिसकी वजह से कांग्रेस को हार मिली थी।
जनता दल को 143 सीटें मिलीं, जिसे भाजपा की 85 और वामपंथी की 52 सीटों का समर्थन था और वीपी सिंह के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ। यह सरकार एक साल से भी कम समय में गिर गई क्योंकि भाजपा ने अपना समर्थन वापस ले लिया और चंद्र शेखर जनता दल के 64 विधायकों के साथ अलग हो गए। उन्होंने समाजवादी जनता पार्टी का गठन किया।
राजीव गांधी ने चंद्र शेखर को प्रधानमंत्री बनाया और बाहर से समर्थन दिया। हालांकि चार महीनों बाद ही उन्होंने समर्थन वापस ले लिया। कथित जासूसी से राजीव गांधी इतने नाराज हुए कि उन्होंने चंद्रशेखर से मामले में स्पष्टीकरण लेने से मना कर दिया।
कांग्रेस ने इस बात पर ध्यान दिया कि हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की सरकार है जोकि समाजवादी जनता पार्टी में एक प्रतिष्ठित नेता थे। उसने निष्कर्ष निकाला कि कथित सर्विलांस को चौटाला ने चंद्र शेखर के कहने पर अंजाम दिया था। बहुत सी अफवाहें जोरों पर थी। जिनमें से एक अफवाह थी कि चौटाला के भाई रंजीत सिंह ने राजीव गांधी को इस कथित जासूसी के बारे में बता दिया था। रंजीत अपने पिता देवी लाल के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार में मंत्री पद संभाल चुके थे। उन्होंने अपने नेटवर्क के जरिए इस जासूसी के बारे में सूचना निकाली थी।
राजीव गांधी ने
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान चंद्र शेखर का साथ ना देने का फैसला लिया जिसकी वजह से 6 मार्च, 1991 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जिसके बाद लोकसभा और विभिन्न राज्यों के लिए जून में चुनावों की घोषणा हुई। फिर किसी भी सरकार ने कथित जासूसी नहीं की और ना ही मामले की तह तक जाने की कोशिश की। कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भजन लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने भी इस मामले की जांच नहीं की। चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई।