17 साल बीत गए, पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू ब्लॉक में महज 16 बेड ही रहे, 17 नहीं हुए। यहां रोजाना आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की लंबी कतार रहती है। रोजाना बेड को लेकर किचकिच होती है। महज 16 बेड होने से सैकड़ों मरीज निराश होकर निजी अस्पतालों की शरण लेते हैं।
लंबे समय से मांग की जा रही है कि आईसीयू में बेड बढ़ाए जाएं। ऐसा हो जाने से मरीजों को सहूलियत होगी। बीएचयू अस्पताल में 1999 में आईसीयू ब्लॉक की शुरुआत हुई थी। बनारस समेत पूर्वांचल, बिहार, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों और नेपाल तक के मरीज हजारों की तादाद में यहां आते हैं।
आईसीयू स्थापित होने के बाद बेहतर इलाज की उम्मीद जगी थी लेकिन आईसीयू की सीमित क्षमता मरीजों के दबाव के आगे बौनी ही साबित होती है। अस्पताल 1250 से अब 1500 बेड का हो गया है। पिछले 17 साल में मरीजों की संख्या में दिन दूना-रात चौगुना इजाफा हुआ लेकिन आईसीयू में बेड की संख्या उतनी की उतनी ही रही।