उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार और दोहरे हत्याकांड के दोषी व्यक्ति को मौत की सजा दिए जाने से तीन दिन पहले ही इसके अमल पर मंगलवार को रोक लगा दी। कोयंबटूर की इस हृदयविदारक घटना के इस अपराधी की मौत की सजा की उच्चतम न्यायालय ने पिछले महीने ही पुष्टि की और इस फैसले पर 20 सितंबर को अमल होना था।
न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने शीर्ष अदालत के एक अगस्त के फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली दोषी मनोहरन की याचिका पर 16 अक्ब्टूबर को सुनवाई की जाएगी।दोषी की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह दोषी का प्रतिनिधित्व कर रही वकील को इस मामले में बहस के लिए अंतिम अवसर प्रदान कर रही है क्योंकि यह मौत की सजा का मामला है।
वकील ने पीठ को सूचित किया कि दोषी की मौत की सजा पर 20 सितंबर को अमल के लिए पहले ही मौत का फरमान जारी हो चुका है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, मामले को 16 अक्टूबर, 2019 को दोपहर तीन बजे सूचीबद्ध किया जाए क्योंकि हमारे फैसले पर मौखिक बहस के लिए अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इस बीच, मौत की सजा के अमल पर रोक रहेगी।
शीर्ष अदालत ने एक अगस्त को मनोहरन को 10 साल की बच्ची के सामूहिक बलात्कार और उसकी तथा उसके सात साल के भाई के हाथ बांधकर नहर में फेंक कर हत्या करने के जुर्म में मौत की सजा की पुष्टि की थी।
पीठ ने 2:1 के बहुमत से दिए गए अपने फैसले में इसे बेरहमी के साथ किया गया अपराध करार देते हुए अपराधी को मौत की सजा सुनाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। इस दोषी की मौत की सजा की मद्रास उच्च न्यायालय ने भी पुष्टि कर दी थी। पीठ ने कहा था कि यह दुर्लभ में भी दुर्लभतम अपराध की श्रेणी में आता है।
इस मामले की मंगलवार को सुनवाई के दौरान मनोहरन की वकील ने दलील दी कि वह इस मामले में बहस करने से पहले निचली अदालत में रखे इस मुकदमे के रिकार्ड का निरीक्षण करना चाहती हैं।
दोषी की वकील ने न्यायालय से कहा कि इस मामले की सुनवाई के दौरान मनोहरन लगातार जेल में ही रहा जबकि उसकी ओर से सात वकील बदले गए जिसकी वजह से निचली अदालत से लेकर शीर्ष अदालत तक दोषी का सही तरीके से प्रतिनिधित्व नहीं हुआ।