फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कठोर उदाहरण: संगीन अपराधों में गिरफ्तारी पर 'माननीयों' को छोड़ना पड़ता है पद, तत्काल पदमुक्ति के कड़े प्रावधान

Fri, 22 Aug 2025 07:42 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

दुनियाभर के लोकतंत्रों में गिरफ्तारी पर नेताओं की पदमुक्ति के सख्त नियम हैं। जापान, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में गिरफ्तारी के साथ ही पद छिन जाता है, जबकि भारत में अभी न्यायिक या संसदीय प्रक्रिया जरूरी है। संसद ने ऐसे विधेयक को जेपीसी को भेजा है जो बदलाव की ओर संकेत करता है।

विज्ञापन
कई देशों में नेताओं को देना पड़ता है तत्काल इस्तीफा (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों में भ्रष्टाचार, आतंकवाद से जुड़ी साजिश, हत्या, राजद्रोह जैसे संगीन अपराध में गिरफ्तारी होने पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मंत्रियों को तत्काल पद छोड़ना पड़ता है। कुछ देशों में यह प्रक्रिया स्वतः लागू होती है, जबकि कुछ में महाभियोग या न्यायिक आदेश की जरूरत पड़ती है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों ने गिरफ्तारी पर तत्काल पदमुक्ति का कड़ा प्रावधान लागू कर रखा है।

विज्ञापन


एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया सबसे कठोर उदाहरण माने जाते हैं, जहां गिरफ्तारी के साथ ही मंत्री या राष्ट्रपति पद से बाहर हो जाते हैं। भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में सांविधानिक प्रतिरक्षा या महाभियोग प्रक्रिया की वजह से स्वतः पदमुक्ति नहीं होती, बल्कि न्यायालय या संसद की कार्रवाई के बाद निर्णय होता है। ब्राजील, पेरू और अर्जेंटीना ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है, जहां गिरफ्तारी और महाभियोग साथ-साथ चलते हैं।

वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन में यह व्यवस्था महाभियोग और सांविधानिक परंपरा पर आधारित है। इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप सिद्ध होने पर अदालत ने उन्हें सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य ठहराया था। ब्राजील में 2016 में राष्ट्रपति दिल्मा रोसेफ को संसद ने महाभियोग चलाकर पद से हटाया था। भारतीय संसद ने भी प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्री या सांसद के किसी संगीन अपराध में गिरफ्तार होने और 30 दिन तक जमानत नहीं मिलने पर स्वत: पदमुक्त मानने वाला विधेयक जेपीसी को भेज दिया है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- RSS: नए-आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी विकल्प, रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे; संघ की आर्थिक शाखाओं का निष्कर्ष

अमेरिका-ब्रिटेन में सांविधानिक परंपरा
अमेरिका में राष्ट्रपति को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया लागू होती है। वहीं, मंत्री या गवर्नर की गिरफ्तारी पर पद स्वतः समाप्त हो जाता है। ब्रिटेन में कोई लिखित सांविधनिक प्रावधान नहीं है, लेकिन सांविधानिक परंपरा और राजनीतिक दबाव के चलते मंत्रियों को गिरफ्तारी या पुलिस जांच के बाद इस्तीफा देना पड़ता है।

भारत में स्वत: पदमुक्ति का प्रावधान नहीं
भारत में राष्ट्रपति को सांविधानिक प्रतिरक्षा प्राप्त है और उन्हें पद पर रहते गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री और मंत्रियों के मामले में गिरफ्तारी पर स्वतः पदमुक्ति का प्रावधान नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के 2013 के लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले में यह साफ किया गया कि सांसद या विधायक के दोष सिद्ध होते ही उनकी सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाएगी। पाकिस्तान-बांग्लादेश में गिरफ्तारी के साथ संसद महाभियोग की कार्यवाही शुरू कर देती है, जबकि नेपाल-श्रीलंका में पीएम या मंत्रियों की गिरफ्तारी सीधे पदमुक्ति का आधार बनती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- जलवायु परिवर्तन: पिघलते ग्लेशियर व बारिश ने 11,113 नदियों को बनाया खतरनाक, एशिया की जीवनरेखा पर संकट

सत्ताधारी नेतृत्व पर भी आम आदमी जैसे ही प्रावधान लागू हों
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का आकलन है कि लोकतंत्र की मजबूती का असली पैमाना यह है कि सत्ताधारी नेतृत्व पर भी वही कानूनी मानक लागू हों, जो आम नागरिकों पर होते हैं। यही वजह है कि कई देशों ने गिरफ्तारी के साथ ही पद स्वतः समाप्त करने का प्रावधान बनाया है, जबकि भारत जैसे कुछ देशों में दोष सिद्ध होने तक पद पर बने रहने की व्यवस्था है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जनता का दबाव और वैश्विक पारदर्शिता मानक इन कानूनों को और कठोर बना सकते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें