अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की टीम ने ऐतिहासिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के अधिकारियों के साथ आर्थिक नीतियों और सुधारों पर अधिकारियों के साथ रचनात्मक और महत्वपूर्ण चर्चा की। आईएमएफ ने गुरुवार को इस संबंध में एक बयान भी जारी किया। बयान में कहा गया कि उसने श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ रचनात्मक और उपयोगी चर्चा पूरी कर ली है, लेकिन चेतावनी दी है कि संकटग्रस्त द्वीप राष्ट्र को कर्ज पुनर्गठन पर और अधिक करने की जरूरत है। इसके साथ ही बेलआउट पैकेज को अंतिम रूप देने से पहले देश में भ्रष्टाचार की कमजोरियों को दूर करने के लिए संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
गौरतलब है कि 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से श्रीलंका सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश में विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण महंगाई अपने चरम पर पहुंच गई है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी से निपटने के लिए श्रीलंका को कम से कम 4 बिलियन अमरीकी डालर की जरूरत है।
आईएमएफ ने एक बयान में कहा कि आने वाले समय में विस्तारित फंड सुविधा व्यवस्था पर एक कर्मचारी-स्तर के समझौते पर पहुंचने की दृष्टि से चर्चा जारी रहेगी। आईएमएफ ने अपने बयान में चेतावनी दी कि सार्वजनिक ऋण की अस्थिरता के कारण, श्रीलंका के लेनदारों से पर्याप्त वित्तपोषण आश्वासन की आवश्यकता है कि ऋण स्थिरता को बहाल किया जाए।
गौरतलब है कि आईएमएफ की टीम ने 20 जून को एक आर्थिक कार्यक्रम पर चर्चा जारी रखने के लिए कोलंबो पहुंची थी। तब श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने आईएमएफ के साथ ऋण पुनर्गठन योजना पर बात करते हुए कहा था कि हम लाजार्ड और क्लिफोर्ड चांस की टीमों के साथ मिलकर जुलाई के अंत से पहले इस योजना की रूपरेखा को पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे।
गौरतलब है कि द्विपीय देश श्रीलंका इन दिनों 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इसकी प्रमुख वजह देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होना है। वर्तमान हालातों को देखें तो फॉरेक्स रिजर्व लगभग खत्म हो चुका है। देश जरूरी सामानों का आयात करने भी भी असमर्थ है। ये बड़ा कारण है श्रीलंका में पनपे इस विकराल आर्थिक संकट का। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है और हालात सुधरते दिखाई नहीं दे रहे हैं।