भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार भारत में जुलाई में औसत तापमान सबसे अधिक दर्ज किया गया। यह न्यूनतम या रात के समय का तापमान था न कि अधिकतम तापमान। जिसके कारण जुलाई को उच्चतम औसत तापमान वाले महीने के तौर पर दर्ज किया गया है। जुलाई का औसत तापमान 28.65 डिग्री सेल्सियस था। पिछला औसत तापमान 2015 में 28.64 डिग्री सेल्सियस और 1987 में 28.62 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। दोनों ही अल-नीनो के वर्ष थे।
इस साल फिर से कमजोर अल-नीनो की स्थिति प्रबल है। अल-नीनो एक जलवायु स्वरूप है। प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र के समुद्र के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में आए बदलाव के लिए उत्तरदायी समुद्री घटना को अल-नीनो (अल-नीनो या अल-निनो) कहा जाता है। अल-नीनो वर्ष के दौरान भारत में मानसूनी वर्षा सामान्य से नीचे और ऊष्मा तरंगें सामान्य से अधिक होती हैं।
आईएमडी पुणे के जलवायु अनुसंधान प्रभाग के मुखिया एके श्रीवास्तव ने कहा, 'जुलाई में उच्च न्यूनतम तापमान ने उच्च औसत तापमान में योगदान दिया। यह मुख्य रूप से देश के कई हिस्सों में जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में रात के समय बादल छाए रहने का नतीजा था। इस साल अधिकतम तापमान 32.40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह तीसरा सबसे उच्चतम रिकॉर्ड है।'
इस साल जून का तापमान 1901 से अब तक का चौथा सबसे उच्चतम तापमान था। 1901 से ही आईएमडी ने तापमान का रिकॉर्ड रखना शुरू किया था। जून का औसतन तापमान 30.26 डिग्री सेल्सियस था। 1926 में जून में औसत तापमान 30.31 1958 में 30.33, और 2014 में 30.33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। भारत के कई राज्यों ने इस साल जून में अधिकतम तापमान के लिए एक नया रिकॉर्ड बनाया है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि मानसून बारिश के असमान वितरण का बहुत गहरा प्रभाव खेती पर पड़ा है। इसे वैश्विक तापमान में हुई बढ़त से भी जोड़ा जा रहा है। आईएमडी के जून बुलेटिन के अनुसार गुवाहाटी, झांसी, कोटा, पिलानी, भोपाल, गुणा, ग्वालियर, औरंगाबाद, बारामती, करवार और कोझीकोड में सबसे ज्यादा औसतन तापमान रिकॉर्ड किया गया। झांसी में इस साल 48 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। वहीं 1924 में यहां का तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस था।