कैसे देते थे वारदात को अंजाम?
निःसंतान दंपतियों को आईवीएफ के बजाय सरोगेसी विधि चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। पुलिस में दर्ज प्रारंभिक शिकायत में यह पता चला कि सरोगेसी विधि के माध्यम से बच्चे का विकल्प चुनने वाले दंपति को सरोगेसी के माध्यम से अपने स्वयं के अंडाणु और शुक्राणु का उपयोग करके भ्रूण बनाने का वादा किया गया था। निःसंतान दंपतियों को कहा गया कि इसे जांचने के बाद क्लिनिक द्वारा व्यवस्थित सरोगेट मां में प्रत्यारोपित किया जाएगा।
यह मामला 30 लाख रुपये में तय होता था। इसमें से 15 लाख रुपये चेक के माध्यम से और 15 लाख रुपये नकद सरोगेट को दिए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद, दंपति को एक लड़का सौंप दिया गया। हालांकि, डीएनए सत्यापन से पुष्टि हुई कि बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था। इस रैकेट में कई एजेंट भी शामिल पाए गए, जो गरीब, कमजोर और गर्भवती महिलाओं को पैसे का लालच देकर जन्म के तुरंत बाद उनका बच्चा ले लेते थे।
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ईडी के जांच में कौन सी बात आई सामने?
ईडी की जांच से पता चला है कि डॉ. नम्रता ने कई दम्पतियों को उपरोक्त तरीके से ठगा और उनसे चेक व नकद के माध्यम से भारी रकम वसूली। इस रकम का एक हिस्सा उन सरोगेट्स/महिलाओं को दिया गया जिन्होंने अपने बच्चे दिए और इस प्रक्रिया में मदद करने वाले एजेंटों को कमीशन मिला। जांच एजेंसी के मुताबिक, अपराध की अधिकांश राशि डॉ. नम्रता ने अपने पास रख ली और उसका इस्तेमाल उन्होंने संपत्ति अर्जित करने सहित निजी उद्देश्यों के लिए किया।
कई अहम दस्तावेज जब्त
ईडी द्वारा की गई तलाशी में कई अहम दस्तावेजों को जब्त किया गया है। इनकी जांच से पता चला है कि वह हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, नेल्लोर, कोलकाता आदि में विभिन्न केंद्रों में देश भर के जोड़ों को ऐसी सेवाएं दे रही थी। जब्त दस्तावेजों से यह भी पता चला कि डॉ. नम्रता 10 वर्षों से अधिक समय से इन गतिविधियों में शामिल थी। उसने यह दिखाने के लिए सरोगेसी समझौतों के रूप में कानूनी दस्तावेज तैयार किए कि निःसंतान जोड़े और वाहक (सरोगेट) ने खुद उससे संपर्क किया और वह सिर्फ सरोगेसी सेवाएं प्रदान कर रही थी।
जब्त दस्तावेजों से यह भी पता चला कि एक मामले में, विदेशी पासपोर्ट रखने वाले माता-पिता को पता चला कि उसके क्लिनिक के माध्यम से जन्मा बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था, जब डीएनए परीक्षण के बाद यह पुष्टि हो गई कि बच्चा उनका जैविक बच्चा नहीं था, तो बच्चे का विदेशी पासपोर्ट अस्वीकार कर दिया गया था। जब्त सामग्री में अपराध की आय से उसके द्वारा अर्जित संपत्तियों के दस्तावेज भी शामिल हैं।