सरकार ने यह भी कहा कि न्यायपालिका अवैध रूप से भारत में घुसपैठ करने वालों को शरणार्थी का दर्जा देने के मकसद से एक अलग श्रेणी बनाने के लिए संसद व कार्यपालिका के विधायी और नीतिगत क्षेत्र में दखल नहीं दे सकती। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को शीर्ष कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा, रोहिंग्या अवैध अप्रवासी हैं और उन्हें शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत, देश में सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही बसने का मौलिक अधिकार है।
विदेशी अधिनियम के तहत निपटा जाएगा...
सरकार ने कहा, अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वालों से विदेशी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निपटा जाएगा। भारत, 1951 के शरणार्थी सम्मेलन और शरणार्थियों की स्थिति, 1967 से संबंधित प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए रोहिंग्याओं से अपने घरेलू कानून के अनुसार निपटेगा।