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Sri Lanka Crisis: 'अगर भारत, श्रीलंका की तुलना गलत है, तो क्यों...' ओवैसी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

Wed, 20 Jul 2022 08:32 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि श्रीलंका एक बहुत गंभीर संकट का सामना कर रहा है जो भारत को स्वाभाविक रूप से चिंतित करता है। उन्होंने भारत में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को खारिज कर दिया। 
 
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने सात दशकों में सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में बिगड़ती स्थिति पर मंगलवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में श्रीलंका के मौजूदा हालात के बारि में विपक्ष को जानकारी दी गई। वहीं इस दौरान विपक्ष के कई नेताओं ने भारत की आर्थिक स्थिति की तुलना श्रीलंका से कर दी। इसके बाद विदेश मंत्री ने भारत में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को खारिज कर दिया। अब विदेश मंत्री के इस बयान के बाद एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पूछा है कि 'अगर भारत, श्रीलंका की तुलना गलत है, तो क्यों? क्या केंद्र सरकार के पास इसका जवाब है? ओवैसी ने कहा कि आपके पास सवाल का जवाब नहीं है तो आर्थिक मामलों के विभाग ने प्रस्तुति क्यों दी?

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ओवैसी ने सरकार से डाटा सार्वजनिक करने के लिए कहा
ओवैसी ने कहा कि श्रीलंका में संकट इसलिए है क्योंकि राष्ट्रपति गोतबाया ने डाटा दबा दिया और भ्रष्टाचार किया। भारत सरकार भी डाटा छुपा ही रही है। अगर दोनों देशों की तुलना गलत है तो भारत सरकार के पीएमओ को भी बेरोजगारी और बाल श्रम पर डाटा जारी करना चाहिए।

सर्वदलीय बैठक में सरकार ने भटकाने वाले मुद्दों पर चर्चा की: ओवैसी
 ओवैसी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सरकार ने भारत की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर बात न कर भटकाने वाले मुद्दों पर चर्चा की। इन मुद्दों का देश की आर्थिक स्थिति से कोई संबंध नहीं था।
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भारतीय राज्यों की वित्तीय स्थिति के जिक्र पर विपक्ष ने जाहिर की आपत्ति
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में भारतीय राज्यों की वित्तीय स्थिति के जिक्र पर आपत्ति जताई गई। टीआरएस सूत्र ने कहा कि हमने राज्य के उधार के जिक्र पर कड़ी आपत्ति जताई। केंद्र जो उधार ले रहा है उस पर चर्चा क्यों नहीं? इसमें राजनीति क्यों लाते हो? भाजपा कार्यालय ने अपने राजनीतिक उद्देश्यों के माध्यम से तेलंगाना के वित्तीय मुद्दों को उजागर किया है।  

सर्वदलीय बैठक में राजकोषीय विवेक और श्रीलंका की स्थिति से सीख लेने पर चर्चा की गई। कुछ दलों ने इस मामले को लाने के कदम का विरोध किया और सवाल उठाया। जबकि कुछ दलों ने राजकोषीय विवेक पर चर्चा करने के विचार का समर्थन किया। 

सर्वदलीय बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि श्रीलंका एक बहुत गंभीर संकट का सामना कर रहा है जो भारत को स्वाभाविक रूप से चिंतित करता है। उन्होंने भारत में इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को खारिज कर दिया। जयशंकर ने कहा, हमने आप सभी से सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का अनुरोध करने के लिए पहल की, यह एक बहुत ही गंभीर संकट है और हम श्रीलंका में जो देख रहे हैं वह कई मायनों में एक अभूतपूर्व स्थिति है। 

उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जो एक बहुत करीबी पड़ोसी से संबंधित है और करीबी निकटता को देखते हुए हम स्वाभाविक रूप से इसके परिणामों के बारे में चिंतित हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि श्रीलंका के संदर्भ में कुछ गलत जानकारी वाली तुलना देखी गई है, जिसमें कुछ लोगों ने पूछा है कि क्या भारत में ऐसी स्थिति आ सकती है। 

श्रीलंका पर सर्वदलीय बैठक के बाद विदेश मंत्री ने कहा, हमने दो प्रेजेंटेशन दिखाए। एक राजनीतिक दृष्टिकोण से किया गया था, दूसरा विदेश नीति के दृष्टिकोण से, जिसके जरिए सभी नेताओं को समझाया गया कि श्रीलंका में राजनीतिक अशांति, आर्थिक संकट और ऋण की स्थिति क्या है। भारत ने 3.8 बिलियन डॉलर की सहायता दी है। किसी अन्य देश ने इस वर्ष श्रीलंका को इस स्तर का समर्थन नहीं दिया है। 

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