वर्ष 2019 में भाजपा-शिवसेना सरकार ने स्थानीय निकायों में ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महाराष्ट्र में संबंधित स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं ओबीसी के लिए आरक्षित कुल सीटों के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम 1961 के भाग 12 (2)(सी) की व्याख्या करते हुए ओबीसी के लिए संबंधित स्थानीय निकायों में सीटों का आरक्षण प्रदान करने की सीमा से संबंधित राज्य चुनाव आयोग द्वारा वर्ष 2018 और 2020 में जारी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में उद्धव ठाकरे सरकार की याचिका भी खारिज कर दी।
पूर्व सीएम ने कहा कि ठाकरे सरकार के नकारापन के कारण ओबीसी का राजकीय आरक्षण रद्द हुआ है। यदि वह इसे बहाल नहीं करवा पाती तो सत्ता के सूत्र हमें सौंप दे। हम यदि चार महीने में ओबीसी को पुनः राजकीय आरक्षण नहीं दिलवा सके तो राजनीति से ही संन्यास ले लेंगे।