सुप्रीम कोर्ट ने एंबी वैली की नीलामी प्रक्रिया में सहारा समूह पर लग रहे बाधा डालने के आरोप को गंभीरता से लिया है। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को चेताया कि नीलामी प्रक्रिया में गतिरोध पैदा करने वाले पर अवमानना का मुकदमा चलेगा और ऐसे व्यक्ति को जेल भेज दिया जाएगा।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अदालत में दावा किया कि सहारा समूह एंबी वैली में कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाकर पुणे पुलिस को पत्र लिखा है और इस प्रकार समूह नीलामी प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। सेबी के इस आरोप को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत की ओर से नीलामी का आदेश जारी किए जाने के बाद समूह को इस मसले पर पुणे के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) से संपर्क नहीं करना चाहिए।
पीठ में न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एके सिकरी भी हैं। पीठ ने कहा, ‘नीलामी प्रक्रिया में यदि कोई व्यक्ति बाधा डालता है तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और ऐसे व्यक्ति को छह महीने जेल की सजा दी जाएगी।’ हालांकि बाद में शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह कोई अवमानना कार्रवाई नहीं कर रही है।
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सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने एंबी वैली को कब्जे में ले लिया है जिस कारण कोई भी बोलीदाता नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को 48 घंटे के अंदर बंबई हाईकोर्ट के ऑफिशियल लिक्वीडेटर की निगरानी में यह संपत्ति सौंपने का आदेश दिया। पीठ ने सेबी से कहा कि आप नीलामी प्रक्रिया जारी रखें।