पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के नए चेयरमैन अनुपम खेर को वहां के छात्रों ने खुला खत लिखा है। उन्होंने एक ओर जहां संस्थान की खामियों को उजागर किया है वहीं उनका इन मामलों में क्या मानना है का जबाव भी मांगा है। गजेंद्र चौहान के चैयरमैन बनाए जाने के बाद छात्रो ने 2015 में 139 दिनों तक हड़ताल भी की थी।
क्या लिखा है छात्रों ने यहां पढ़िए-
डियर सर,
फिलहाल तो आप बधाई संदेशों में व्यस्त होंगे, हम लोग आपका ध्यान हमारे आइकोनिक संस्थान के कुछ ऐसे मामलों पर दिलाना चाहते हैं जहां के आप अभी अभी चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। हमें जानना है कि इन मामलों में आपका क्या सोचना है।
1.एफटीआईआई एक प्रीमियर फिल्म इंस्टीट्यूट है। जिसकी शुरुआत विभिन्न प्रकार की फिल्म मेकिंग सिखाने के लिए किया गया था लेकिन धीरे-धीरे शॉर्ट टर्म कोर्स के जरिए ये फंड एकत्रित करने की संस्था मात्र बनकर रह गई है।
हम लोगों का मानना है कि शॉर्ट टर्म कोर्स से हमारी फिल्मों को लेकर जानकारी नहीं मिल रही है। इस महीने के शुरुआत में 20 दिनों का नया 'शॉर्ट कोर्स इन फिक्शन राइटिंग फॉर टेलीविजन' लांच किया है। इसके लिए प्रत्येक छात्र को 20,000 रुपए फीस जमा करनी पड़ रही है जो बहुत ही महंगा है।
2. पिछले एक साल में संस्थान ने ओपन डे, फाउंडेशन डे के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया। यदि ये पैसे छात्रों की सुविधाओं के अलावा संस्थान को रिच करने और लाइट्स, कैंपस को बेहतर बनाने, इंस्ट्रूमेंट के रख रखाव में खर्च किया जाता तो इससे हमारे प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में मदद मिलती।
3. नए सिलेबस में वर्कशॉप और कक्षाओं को लगभग खत्म ही कर दिया गया है। नए क्रेडिट पर आधारित सिस्टम पर सिर्फ हम ही नहीं बल्कि फैकल्टी तक कन्फ्यूज्ड हैं। एक साल से सिलेबस पर कोई बात नहीं हुई है जबकि नए सिलेबस पर बात किए जाने की जरूरत है।
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