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FTII के छात्रों ने नए चेयरमैन अनुपम खेर को लिखा खुला खत

Thu, 12 Oct 2017 09:07 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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अनुपम खेर - फोटो : SELF
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पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के नए चेयरमैन अनुपम खेर को वहां के छात्रों ने खुला खत लिखा है। उन्होंने एक ओर जहां संस्थान की खामियों को उजागर किया है वहीं उनका इन मामलों में क्या मानना है का जबाव भी मांगा है। गजेंद्र चौहान के चैयरमैन बनाए जाने के बाद छात्रो ने 2015 में 139 दिनों तक हड़ताल भी की थी।
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क्या लिखा है छात्रों ने यहां पढ़िए-  

डियर सर, फिलहाल तो आप बधाई संदेशों में व्यस्त होंगे, हम लोग आपका ध्यान हमारे आइकोनिक संस्थान के कुछ ऐसे मामलों पर दिलाना चाहते हैं जहां के आप अभी अभी चेयरमैन नियुक्त किए गए हैं। हमें जानना है कि इन मामलों में आपका क्या सोचना है। 

1.एफटीआईआई एक प्रीमियर फिल्म इंस्टीट्यूट है। जिसकी शुरुआत विभिन्न प्रकार की फिल्म मेकिंग सिखाने के लिए किया गया था लेकिन धीरे-धीरे शॉर्ट टर्म कोर्स के जरिए ये फंड एकत्रित करने की संस्था मात्र बनकर रह गई है। 
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हम लोगों का मानना है कि शॉर्ट टर्म कोर्स से हमारी फिल्मों को लेकर जानकारी नहीं मिल रही है। इस महीने के शुरुआत में  20 दिनों का नया 'शॉर्ट कोर्स इन फिक्शन राइटिंग फॉर टेलीविजन' लांच किया है। इसके लिए प्रत्येक छात्र को 20,000 रुपए फीस जमा करनी पड़ रही है जो बहुत ही महंगा है।

2. पिछले एक साल में संस्थान ने ओपन डे, फाउंडेशन डे के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया। यदि ये पैसे छात्रों की सुविधाओं के अलावा संस्थान को रिच करने और लाइट्स, कैंपस को बेहतर बनाने, इंस्ट्रूमेंट के रख रखाव में खर्च किया जाता तो इससे हमारे प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने में मदद मिलती। 

3. नए सिलेबस में वर्कशॉप और कक्षाओं को लगभग खत्म ही कर दिया गया है। नए क्रेडिट पर आधारित सिस्टम पर सिर्फ हम ही नहीं बल्कि फैकल्टी तक कन्फ्यूज्ड हैं। एक साल से सिलेबस पर कोई बात नहीं हुई है जबकि नए सिलेबस पर बात किए जाने की जरूरत है। 

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4. संस्थान में काम करने वाले लाइट मैन जो पहले पर्मानेंट हुआ करते थे वे अब कान्ट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं। संस्थान सप्ताह में पांच दिन ही काम करता है जबकि लाइट मैन को छह और सात दिन तक भी काम करना पड़ रहा है और इसके लिए उन्हें कोई पैसे नहीं दिए जा रहे हैं। 

5. देश भर में इन दिनों कर्मचारियों को कांट्रैक्ट पर रखे जाने का प्रचलन है कुछ ऐसा ही एफटीटीआई ने में भी अधिकतर फैकल्टी कांट्रैक्चुअल ही हैं। वो हमेशा ही डरे रहते हैं कि उनको हमेशा डर लगा रहता है कि अगर उन्होंने प्रशासन की बात नहीं मानी तो उन्हें कभी भी निकाला जा सकता है। ऐसा कई बार हुआ है कि सैलरी भी तीन-तीन महीने तक नहीं आती है।

6. छात्र बाध्य किए जाते हैं कि कोर्स समय पर पूरा हो गया है उस अंडरटेकिंग पर साइन करने के लिए लेकिन प्रशासन छात्रों को समय पर कोर्स पूरा करने के लिए रिसोर्सेज मुहैया नहीं कराता है।

7. सर, नए सिलेबस के थर्ड सेमेस्टर जिसमें हमें डायलॉग पर काम करना है। सिलेबस के अनुसार समय को तीन दिन आठ घंटे की शिफ्ट कर दी गई है, जो बहुत थकाने वाला है। वहीं लाइटमैन, कारपेंटर, पेंटर और मेकअप आर्टिस्ट के लिए अमानवीय है। जब हम छात्रों ने प्रशासन से सवाल किया तो पांच स्टूडेंट को बिना कारण बताए सस्पेंड कर दिए गए। 

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8. सर, एफटीआईआई फिल्म निर्माता बनाता आ रहा है और इस संस्था से निकले छात्र कई प्लेटफॉर्मों पर काम कर रहे हैं। कुछ लोग फिल्मों में काम करते हैं और कुछ दूसरे वैकल्पिक तरीकों को चुनते हैं। लेकिन छात्रों को फिल्म के दूसरे अभ्यासों पर भी विचार करने के लिए कहा गया है, जहां सिनेमा को एक वस्तु के रूप में देखा जा रहा है, न कि एक कला के रूप में। आप तो जानते ही हैं कि फिल्में समाज को संदेश देने का काम करती हैं।

थैंक यू
रॉबिन जॉय, प्रेसिडेंट, एफटीआईआई स्टूडेंट बॉडी
रोहित कुमार, जनरल सेक्रेटरी, एफटीआईआई स्टूडेंट बॉडी
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