पुणे के उषा किरण अस्पताल के वॉशरूम में बुधवार शाम को कम तीव्रता वाला आईईडी बरामद किया गया था। हालांकि, बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इसे निष्क्रिय कर दिया। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा गया था।
महाराष्ट्र के पुणे शहर के हडपसर इलाके में स्थित उषा किरण अस्पताल के वॉशरूम में संदिग्ध विस्फोटक (आईईडी) मिलने की घटना को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और वाहन की नंबर प्लेट की छवियों को अत्याधुनिक तकनीक की मदद से बेहतर बनाया जा रहा है।
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उषा किरण अस्पताल के वॉशरूम में बुधवार शाम को कम तीव्रता वाले विस्फोटकों से युक्त एक उपकरण मिला था। बम निरोधक दल की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है।
मामले में शामिल शख्स की पहचान की कोशिशें जारी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने संवाददाताओं को बताया कि बरामद सामग्री का गहन विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा, "सीसीटीवी फुटेज को बेहतर बनाया जा रहा है ताकि इसमें शामिल व्यक्ति की पहचान की जा सके। इस्तेमाल किए गए वाहन की नंबर प्लेट को भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्पष्ट पहचान के लिए बेहतर बनाया जा रहा है।"
मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि सीसीटीवी फुटेज की बेहतर गुणवत्ता से यह स्पष्ट हो रहा है कि घटना में कौन व्यक्ति शामिल था। उन्होंने कहा, "यह निश्चित रूप से किसी न किसी प्रकार की साजिश की कोशिश थी। पुलिस जल्द ही आपको पूरी जानकारी के साथ ब्रीफ करेगी।"
मामले में कई एजेंसियां की संयुक्त टीम कर रही जांच
इस मामले की जांच के लिए पुणे पुलिस, अपराध शाखा और आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की एक संयुक्त टीम गठित की गई है। यह टीम घटना के पीछे के मकसद और इसमें शामिल लोगों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज में दिखे शख्स को पूछताछ के बाद दी क्लीन चिट
पुणे पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हडपसर इलाके के एक अस्पताल में बरामद किए गए आईईडी के मामले में सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे व्यक्ति की इस घटना में कोई भूमिका नहीं है। जांच के दौरान पुलिस को अस्पताल परिसर के पास एक इलेक्ट्रिक वाहन चलाते हुए एक व्यक्ति का सीसीटीवी फुटेज मिला। अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति का पता लगाकर उससे पूछताछ की गई, जिसमें उसने घटना से कोई संबंध न होने का दावा किया।