फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कबाड़ से लेकर जंगल तक, वो आइडिया जो बदल देंगे आपकी दुनिया

Sun, 15 Oct 2017 02:24 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
विज्ञापन
- फोटो : BBC
विज्ञापन
इक्कीसवीं सदी में हम बहुत सारी मुश्किलें झेल रहे हैं, जो धरती पर हमारे वजूद को चुनौती दे रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती है बदलती आबो-हवा और बीमारियां। लेकिन ये ऐसी चुनौतियां नहीं हैं जिनका कोई हल नहीं। बीबीसी लगातार ऐसे आइडिया की तलाश में दुनिया भर के एक्सपर्ट से बात कर रहा है, जो हमें चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।
विज्ञापन


जो इक्कीसवीं सदी में इंसान की जिंदगी और धरती को बेहतर बनाने में जुटे हैं। पेश हैं ऐसे ही कुछ तजुर्बे, जो इक्कीसवीं सदी में हमारे लिए बेहतर मिसालें पेश कर रहे हैं।

ब्राजील के जंगलों से भरपूर ऑक्सीजन
जंगलों की अवैध कटाई पूरी दुनिया में होती है। लैटिन अमरीकी देश ब्राजील में काफी घने जंगल हैं। कहा जाता है कि धरती की कुल ऑक्सीजन का 20 फीसदी हिस्सा ब्राजील के जंगल पैदा करते हैं। लेकिन यहां बड़े पैमाने पर जंगलों को साफ किया जा रहा है। गुजरे साल में ही यहां जंगलों को साफ करके खाली जमीन में 29 फीसदी इजाफा किया गया।
विज्ञापन


एक ही साल में इतने बड़े पैमाने पर जंगों की सफाई का ये आंकड़ा आसमान छूने वाला है। इसे रोकने के लिए गूगल अर्थ ने यहां की स्थानीय जनजातियों के साथ मिलकर काम किया, तो उन इलाकों की पहचान ज्यादा आसानी से हुई, जहां अवैध तरीके से जंगल काटे जा रहे हैं। ऐसी कोशिशें दूसरे इलाकों में भी की जा सकती हैं।

पढ़ें: पिछले डेढ़ दशक से तेजी से बढ़ी गर्मी, औसत तापमान में 1.2 डिग्री बढ़ोत्तरी

इक्कीसवीं सदी में हम बहुत सारी मुश्किलें झेल रहे हैं, जो धरती पर हमारे वजूद को चुनौती दे रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती है बदलती आबो-हवा और बीमारियां। लेकिन ये ऐसी चुनौतियां नहीं हैं जिनका कोई हल नहीं। बीबीसी लगातार ऐसे आइडिया की तलाश में दुनिया भर के एक्सपर्ट से बात कर रहा है, जो हमें चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे। जो इक्कीसवीं सदी में इंसान की जिंदगी और धरती को बेहतर बनाने में जुटे हैं। पेश हैं ऐसे ही कुछ तजुर्बे, जो इक्कीसवीं सदी में हमारे लिए बेहतर मिसालें पेश कर रहे हैं।

ब्राजील के जंगलों से भरपूर ऑक्सीजन
जंगलों की अवैध कटाई पूरी दुनिया में होती है। लैटिन अमरीकी देश ब्राजील में काफी घने जंगल हैं। कहा जाता है कि धरती की कुल ऑक्सीजन का 20 फीसदी हिस्सा ब्राजील के जंगल पैदा करते हैं। लेकिन यहां बड़े पैमाने पर जंगलों को साफ किया जा रहा है। गुजरे साल में ही यहां जंगलों को साफ करके खाली जमीन में 29 फीसदी इजाफा किया गया।

एक ही साल में इतने बड़े पैमाने पर जंगों की सफाई का ये आंकड़ा आसमान छूने वाला है। इसे रोकने के लिए गूगल अर्थ ने यहां की स्थानीय जनजातियों के साथ मिलकर काम किया, तो उन इलाकों की पहचान ज्यादा आसानी से हुई, जहां अवैध तरीके से जंगल काटे जा रहे हैं। ऐसी कोशिशें दूसरे इलाकों में भी की जा सकती हैं।
Trending Videos

इलेक्ट्रॉनिक कचरा बड़ा मसला

- फोटो : BBC
इलेक्ट्रॉनिक सामान का कचरा आज सारी दुनिया के लिए एक बड़ा मसला बन गया है। लेकिन इसका भी निदान है। इस कचरे की रिसाइकिलिंग के बजाय खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान के अलग अलग हिस्सों से नया सामान तैयार कर सकते है।

कचरे का इस्तेमाल रेल का बुनियादी ढांचा तैयार करने में भी किया जा सकता है। रेलवे कार बनाने में अगर पुराने टायर का इस्तेमाल किए जाएं, तो उसकी उम्र बढ़ जाती है। रेल लाइन के प्रति किलो मीटर के लिए करीब 35 टन कचरे का इस्तेमाल हो सकता है।

आज बहुत से काम रोबोट की मदद से किए जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इनका इस्तेमाल बीमारियों की परख में भी किया जा सकता है। किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत सी जांच कराई जाती हैं। इसमें वक्त भी बहुत लगता है। लेकिन रोबोट की मदद से बिना किसी जांच के बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। गूगल एक डच यूनिवर्सिटी की टीम के साथ मिलकर इस दिशा में काम शुरू कर चुकी हैं।

नई तरह की मशीनों का इस्तेमाल करके जमीन का उपजाऊपन और फसल खराब होने की वजहों का पता लगाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा पैदावार करने के तरीकों पर भी इन मशीनों के जरिए रिसर्च की जा सकती है। ये नए प्रयोग भुखमरी की लानत से निजात दिलाने में कारगर साबित होंगे।इलेक्ट्रॉनिक कचरा बड़ा मसला

इलेक्ट्रॉनिक सामान का कचरा आज सारी दुनिया के लिए एक बड़ा मसला बन गया है। लेकिन इसका भी निदान है। इस कचरे की रिसाइकिलिंग के बजाय खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान के अलग अलग
हिस्सों से नया सामान तैयार कर सकते है।

कचरे का इस्तेमाल रेल का बुनियादी ढांचा तैयार करने में भी किया जा सकता है। रेलवे कार बनाने में अगर पुराने टायर का इस्तेमाल किए जाएं, तो उसकी उम्र बढ़ जाती है। रेल लाइन के प्रति किलो मीटर के लिए करीब 35 टन कचरे का इस्तेमाल हो सकता है।

आज बहुत से काम रोबोट की मदद से किए जा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इनका इस्तेमाल बीमारियों की परख में भी किया जा सकता है। किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए बहुत सी जांच कराई जाती हैं। इसमें वक्त भी बहुत लगता है। लेकिन रोबोट की मदद से बिना किसी जांच के बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सकता है। गूगल एक डच यूनिवर्सिटी की टीम के साथ मिलकर इस दिशा में काम शुरू कर चुकी हैं।

नई तरह की मशीनों का इस्तेमाल करके जमीन का उपजाऊपन और फसल खराब होने की वजहों का पता लगाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा पैदावार करने के तरीकों पर भी इन मशीनों के जरिए रिसर्च की जा सकती है। ये नए प्रयोग भुखमरी की लानत से निजात दिलाने में कारगर साबित होंगे।

साइबर सुरक्षा बड़ी चुनौती

साइबर सुरक्षा आज सभी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। हैकिंग के जरिए संवेदनशील जानकारियां तक चुरा ली गई हैं। रूस ने इसके लिए व्हाइट हैट हैकर्स का ग्रुप तैयार किया है, जो हैकर्स पर नजर रखेगा।वीडियो गेम्स बच्चों को बहुत पसंद आते हैं।

लेकिन ये इल्जाम भी लगता रहा है कि वीडियो गेम्स बच्चों में हिंसक मिजाज की बुनियाद डालते हैं। लेकिन अमरीका इन वीडियो गेम्स का कूटनीतिक इस्तेमाल कर रहा है। बच्चों को इन गेम्स के जरिए अंग्रेजी भाषा और अमरीका की संस्कृति से रूबरू कराया जा रहा है।आपने रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर के बारे में तो सुना ही होगा। लेकिन स्विटजरलैंड में बड़े-बड़े जलाशय साफ करने में इनकी मदद ली जा रही है।

मोबाइल का इस्तेमाल आज हर कोई कर रहा है। लिहाजा दुनिया भर में बड़े पैमाने पर मोबाइल बनाए जा रहे हैं। मोबाइल बनाने में इस तरह की चीजों का इस्तेमाल होता है, जो धरती पर बहुत कम तादाद में मिलती हैं। ब्रिटिश रिसर्चर ऐसी तकनीक खोजने में लगे हैं, जिससे पता लगाया जा सके कि धरती पर इस तरह की धातुएं और कहां-कहां हैं।

फलों से भरता पेट
हमारा रहन-सहन और धरती का पर्यावरण को सुधारने में वनस्पति विज्ञान की भी मदद ली जा सकती है। किसान कोशिश कर रहे हैं कि वो कम से कम कीटनाशक इस्तेमाल करें। ऐसे तरीकों पर भी काम हो रहा है जिसके जरिए आम फसलों को खास फसलों के साथ मिलाकर नई पैदावार की जा सके।

एक रिसर्च के मुताबिक पौधों की 28 हजार ऐसी नस्लें हैं जिनका इस्तेमाल दवा के तौर पर किया जा सकता है। लेकिन इनका सिर्फ 13 फीसद ही इस्तेमाल होता है। चीन ही ऐसा देश है, जो कुदरती दवाओं को पूरी ताकत से बढ़ावा दे रहा है।एक अंदाजे के मुताबिक 2020 तक चीन इन्ही जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करके 87 फीसद लोगों को सस्ता और अच्छा इलाज मुहैया कराएगा।

अफ्रीकी देश इथियोपिया में एक ऐसा फल होता है, जो अपने आप में पूरा खाना है। इस फल से ही यहां की बहुत बड़ी आबादी का पेट भरता है। ये फल यहां के लोगों के लिए एक तरह का वरदान है।
ऐसे ही फल दुनिया के दूसरे इलाकों में भी जरूर होते होंगे। थोड़ी रिसर्च की जाए तो सारी दुनिया को इससे फायदा पहुंच सकता है।

ऑनलाइन होता हर काम

जंगलों में आग लगना भी एक बड़ी चुनौती है। ये आग अपने साथ जंगलों से मिलने वाली बेशकीमती चीजें भी तबाह कर देती है। रिसर्च करके ऐसे पौधो को पहचान की जा रही है, जिनमें खुद ही आग लग जाती है। ऐसे पौधों को अगर पनपने से रोका जाएगा, तो जंगलों की आग पर बहुत हद तक काबू पाया जा सकेगा।

आज दुनिया तेजी से डिजिटाइजेशन की तरफ बढ़ रही है। छोटे-छोटे बाल्टिक देश तो इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। एस्तोनिया ने तो अपना नाम ही ई-एस्तोनिया रख लिया है। ये दुनिया का पहला ऐसा देश हैं जहां हरेक काम ऑनलाइन होता है।

अगर सभी देश इसी फार्मूले पर काम करेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब आपका देश भी पूरी तरह से डिजिटाइजेशन की दुनिया का हिस्सा बन जाएगा। भारत भी अब दिशा में आगे बड़ रहा है। सरकार का डिजिटाइजेशन पर काफी जोर है।

विंड एनर्जी से चलती सभी ट्रेन
नीदरलैंड में लगभग सभी रेलगाड़ियां पवन ऊर्जा से ही चलती हैं। नीदरलैंड्स इस महत्वकांक्षी लक्ष्य को 2018 तक हासिल करना चाहता था लेकिन उसने इस साल की शुरुआत में ही इसे पा लिया।
कुदरती संसाधनों के बेजा इस्तेमाल से बचने के लिए बहुत से तरीकों पर काम जारी है। यूरोपीय यूनियन हवा और पानी की काई साफ करने के लिए सस्ते और आसानी से लगाई जाने वाली मशीन बनाने पर काम कर रहा है।

व्यापार के लिए बड़े-बड़े जहाजों का इस्तेमाल होता है। लेकिन ये जहाज पर्यावरण के लिए मुफीद नहीं हैं। लिहाजा यूरोपीय यूनियन ऐसे जहाज बनाने पर विचार कर रहा है जिन्हें बाद में रिसाइकिल किया जा सके। इसके लिए स्टील की जगह फाइबर का इस्तेमाल किया जाएगा।

बढ़ती आबादी एक बड़ा मसला है। जो देश रकबे के लिहाज से छोटे हैं, वहां तो ये मसला और पेचीदा हो जाता है। जमीन पर दबाव बढ़ने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों पर भी इसका असर पड़ता है। जापान इस मुश्किल से निपटने के लिए तालाबों और नदियों के ऊपर बड़े-बड़े सोलर प्लांट लगा रहा है।
विज्ञापन

नहीं रहेंगे मच्छर

अमरीका के ह्यूस्टन शहर में ऐसे सेंसर लगाए जाने की दिशा में काम हो रहा है जो जीका वायरस फैलाने वाले मच्छरों की पहचान कर उन्हें खत्म कर देंगे। माइक्रोसॉफ्ट इस काम में एक अहम रोल निभा रहा है।बच्चों को साफ सफाई की अहमियत और एड्स जैसी बीमारी के कारण समझाने के लिए कठपुतलियों का बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है।

दुनिया की करीब 40 फीसद आबादी के पास साफ शौचालय नहीं हैं। बंगलादेश और भारत में तो लोगों को शौचालय इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।ऐसे शौचालय बनाने और उनका इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है जिससे गंदगी भी ना फैले और खर्चा भी कम हो।

मोबाइल का इस्तेमाल आज हर कोई कर रहा है। लंदन की एक कंपनी ने पूर्वी अफ्रीका में करीब 85 हजार सोलर पावर वाली बैटरी बांटे हैं। जिसका इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर लोग एक दूसरे से जुड़े हैं।

बीमारियों के इलाज का अनूठा तरीका
बेरोजगारी खत्म करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। फिनलैंड ने एक स्कीम शुरू की है जिसके तहत बेरोजगार नागरिकों की तलाश करके उन्हें काम दिया जाता है।लंदन में एक और शुरुआत की गई है, जिसके तहत लोगों को अपना थूक लैब में देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ये पता लगाया जा सकेगा कि किस में एंटीबायोटिक से लड़ने की ताकत सबसे ज्यादा है। एक हजार नमूनों में सिर्फ दो ही नमूनों में इससे लड़ने की ताकत सबसे ज्यादा पाई गई है।

लिंफोमा और ल्यूकेमिया जैसी बीमारियों का इलाज आसान नहीं है। लेकिन खून की कोशिकाओं में सुधार करके हड्डियों में ही ऐसे सेल पैदा करने की कोशिश की जा रही है, जिससे इन बीमारियों का सस्ता और टिकाऊ इलाज मुमकिन हो सके।

2035 तक दुनिया की 40 फीसदी आबादी हाईटेक शहरों में रहने लगेगी। इसके लिए हर घंटे में 4 हजार हाऊसिंग यूनिट की जरूरत पड़ेगी। इस जरूरत को पूरा करने के लिए 3-डी प्रिंटिग का इस्तेमाल किया जा सकता है।धरती को रहने के लिए एक अच्छा मकाम बनाना जरूरी है। अगर सभी लोग अपना सहयोग देंगे तो ये काम मुमकिन हो सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें