दुनिया भर में भारी तबाही मचाने वाली वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के इलाज के लिए अभी तक कोई टीका नहीं बन पाया है। पिछले साल चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस की वजह से विश्व में अब तक लाखों लोग संक्रमित हो चुके हैं और जान भी गंवा चुके हैं। हालांकि इस दौरान अलग-अलग देशों में कई तरह के प्रयोग किए गए और तरीके ढूंढे गए, लेकिन किसी भी तरह के इलाज में शत प्रतिशत परिणाम नहीं मिले। इसी कड़ी में भारत में कान्वलेसेंट प्लाज्मा थेरेपी (सीपीटी) के रूप में जगी उम्मीद भी अब दम तोड़ने लगी है।
देश की शीर्ष मेडिकल संस्था भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इसे लेकर अब सख्त चेतावनी जारी की है। बुधवार को जारी एक बयान में आईसीएमआर ने कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए सीपीटी के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है।
आईसीएमआर की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 मरीजों के ठीक होने या उनके मृत्यु दर में इस थेरेपी के इस्तेमाल से कोई खास बदलाव नहीं मिला है। संस्था ने अपनी रिपोर्ट में नीदरलैंड और चीन जैसे कई देशों में हुई शोध का हवाला देते हुए अपनी बात रखी है।
गौरतलब है कि प्लाज्मा थेरेपी में ठीक हो चुके कोरोना के मरीजों का प्लाज्मा लेकर किसी संक्रमित के शरीर में डाला जाता है और उसकी मदद से उसका उपचार किया जाता है।