भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने सभी राज्यों को जिलों में रैपिड एंटीजन टेस्ट की क्षमता बढ़ाने को कहा है। आईसीएमआर ने कहा कि राज्य अपने यहां ऐसे केंद्र बनाएं, जो एंटीजन टेस्ट करेंगे। आईसीएमआर ने कहा कि संस्थान को पीएसयू, सरकारी और निजी संस्थान, मंदिर जैसी कई जगहों ने अपने यहां एंटीजन टेस्ट करने की शुरू करने की अपील की है।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि एंटीजन टेस्ट से ज्यादा से ज्यादा टेस्ट किए जा सकते हैं। ये इसलिए जरूरी है ताकि ये पता लगाया जा सके कि देश में कोरोना वायरस के कितने मरीज संक्रमित हैं। आईसीएमआर ने सभी जिलों के लिए एक सामान्य लॉग-इन क्रेडेंशियल बना दिया है ताकि हर संस्थान, लैब और अस्पताल को आईसीएमआर के पोर्टल पर अलग से डाटा ना डालना पड़े।
राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वो एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट के परिणामों को एक-दूसरे से लिंक करें। ऐसा जरूरी नहीं है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोई व्यक्ति नकारात्मक आया हो, तो उसमें कोरोना वायरस नहीं है। दरअसल रैपिड एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता आरटी-पीसीआर की तुलना में थोड़ी कम है।
इसलिए एंटीजन में आए कोरोना नेगेटिव मरीजों का आर-पीसीआर टेस्ट किया जाता है ताकि कोरोना वायरस होने की पुष्टि की जा सके। राज्यों को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के लिए भी कहा गया है, जो आईसीएमआर से सीधा संपर्क करेगा। डॉ बलराम भार्गव ने सभी राज्यों को रैपिड एंटीजन टेस्ट करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ भार्गव ने कहा कि जिले के आधार पर लॉग-इन क्रिडेंशियल को सभी एंटीजन टेस्टिंग केंद्रों के साथ साझा किया जाए, जिससे आईसीएमआर के पोर्टल पर सारा आंकड़ा एकत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्यों को दिए गए निर्देशों का पालन हो ताकि कोविड-19 महामारी से लड़ा जा सके, मरीजों की जान बचाई जा सके और सुरक्षित की जा सके।
कंटेन्मेंट जोन और अस्पतालों में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट करने के लिए कहा गया है। वायरोलॉजिस्ट का कहना है कि जितना ज्यादा टेस्ट किया जाएगा, उतना लोगों को अलग रखा जाएगा और कोरोना को फैलने से रोकने में आसानी होगी।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जितना जल्दी लोगों में कोरोना वायरस की पहचान कर ली जाएगी, उतनी ही जल्दी लोगों को उनके समुदाय से अलग कर बाका के समुदाय को बचाया जा सकता है।