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कोविड-19: भारत में अगले दो महीने में आएगी नई टेस्ट किट, वायरस को किया गया आइसोलेट

Wed, 01 Apr 2020 06:37 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अगले दो महीने में भारत को मिलेंगी नई टेस्ट किट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का कहना है कि भारत में अगले दो महीनों के अंदर नए सीरोलॉजिकल डायग्नोस्टिक परीक्षण किट का निर्माण शुरू होने की संभावना है, क्योंकि अनुसंधान एजेंसियों ने वायरस को अलग-थलग (आइसोलेट) किया हुआ है।

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आईसीएमआर के मुख्य महामारी विज्ञानी और संचारी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आरआर गंगाखेड़कर ने कहा कि एक बार वायरस के अलग-थलग हो जाने पर इसे डायग्नोस्टिक किट, दवाओं और टीकों के विकास के लिए अनुसंधान को आगे ले जाने में मदद मिलती है और भारत उस दिशा में काम कर रहा है।

डॉक्टर गंगाखेड़कर ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले एक से दो महीनों में भारत में कम से कम एक सीरोलॉजिकल डायग्नोस्टिक परीक्षण किट बन जाएगी।

बता दें कि सीरोलॉजिकल परीक्षण ऐसे परीक्षण को कहते हैं जो खून में एंटीबॉडी की तलाश करके बीमारियों का निदान करने में मदद करते हैं।

इसी बीच सार्स-कोव2 और कोविड-19 के अनुसंधान और विकास पर तेजी से फैसले लेने के लिए सरकार ने वीके पॉल और प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के विजयराघवन की सह-विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति का गठन किया है। समिति वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अन्य विज्ञान एजेंसियों, वैज्ञानिकों, उद्योगों और नियामक निकायों के साथ समन्वय में काम करेगी ताकि वे बीमारी के समाधानों पर तुरंत निर्णय ले सकें।
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समिति ने डीएसटी, डीबीटी, सीएसआईआर, डीएई, डीआरडीओ और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के तहत संस्थानों को स्व-मूल्यांकन करने और मानक और सख्त प्रोटोकॉल के जरिए अनुसंधान और परीक्षण के लिए अपनी प्रयोगशालाओं को तैयार करने के लिए मंजूरी दे दी है।

इसके अलावा आईसीएमआर क्लिनिकल ट्रायल और ऑपरेशन अनुसंधान पर अपनी पूरी ताकत के साथ कोविड-19 के लिए एक टीका विकसित करने के एजेंडे पर डीबीटी और सीएसआईआर के साथ मिलकर काम कर रहा है। निजी परीक्षण प्रयोगशालाओं को स्वीकृति देने में लगने वाले समय को लेकर जारी चिंता पर डॉक्टर गंगाखेडकर ने साफतौर पर कहा, कि समय का कोई अंतराल नहीं है। 

उन्होंने कहा, कोई देरी नहीं हो रही है, हम उन लोगों को अनुमति दे रहे हैं जो मानदंड में फिट बैठ रहे हैं। अब उन्हें किट खरीदनी है। अगर उन्हें इसमें किसी तरह की समस्या आती है, तो उन्हें इसका समाधान खुद ही करना होगा। हम इसे लेकर कुछ नहीं कर सकते हैं।'

अब तक आईसीएमआर ने 49 निजी प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है और इन प्रयोगशालाओं में 399 रोगियों का परीक्षण किया गया है। आईसीएमआर का कहना है कि वर्तमान परीक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकारी प्रयोगशालाओं में पर्याप्त क्षमता और स्टॉक मौजूद है।
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