नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
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कई राज्य कोविड-19 के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाली आरटी-पीसीआर तकनीक के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा तय की गई लगभग 4,500 रुपये की कीमत को कम करने की मांग कर रहे हैं। कीमतों में संशोधन को लेकर आवाजें पहले के मुकाबले तेज होती जा रही हैं।
दरअसल, बहुत सी निजी लैब पांच हजार रुपये में कोविड-19 के परीक्षण के साथ ही 50 और परीक्षणों का पैकेज दे रही हैं। जिससे इस तर्क को बल मिला है कि आईसीएमआर द्वारा तय दर को कम किया जा सकता है। बहुत से राज्यों में निजी लैब में किए जा रहे कोविड-19 परीक्षणों की संख्या में वृद्धि हुई है।
ऐसे में सरकारों ने प्रतिपूर्ति (रिंबर्समेंट) दर की घोषणा की है। इसमें गुजरात दो हजार रुपये और हरियाणा 3,500 रुपये की प्रतिपूर्ति कर रहा है। हालांकि अस्पतालों में परीक्षण कराने वालों के लिए और लैब में खुद परीक्षण कराने वालों के लिए आईसीएमआर द्वारा तय भुगतान लागत 4,500 रुपये ही है।
केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए इसी तरह की लागू योजना में भी भुगतान दर 4,500 रुपये निर्धारित की गई है। आईसीएमआर ने निजी लैब को परीक्षण करने की अनुमति देने से पहले उनसे अपील की थी कि वह कोविड-19 का मुफ्त में परीक्षण करें। हालांकि किसी ने भी इस अपील पर ध्यान नहीं दिया।
निजी लैब का तर्क है कि वेतन और भुगतान करने के लिए किट और अभिकर्मकों की लागत ज्यादा आती है। इसलिए वे मुफ्त में ऐसा नहीं कर सकते हैं। वहीं डायग्नोस्टिक कंपनी थायरोकेयर कोविड-19 के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण के साथ सुरक्षित सर्जरी प्रोफाइल, सुरक्षित गर्भावस्था प्रोफाइल, सुरक्षित आईवीएफ प्रोफाइल और सुरक्षित डायलिसिस प्रोफाइल जैसे 50-53 परीक्षणों का पैकेज केवल 4,999 रुपये में दे रहा है।