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तंबाकू का सेवन करने वाले सावधान! पिछले 6 सालों में 114 फीसदी बढ़ा मुंह का कैंसर

Fri, 16 Nov 2018 10:44 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
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lips cancer
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बढ़ता प्रदूषण और तंबाकू चबाने के बढ़ते चलन की वजह से भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। पिछले छह वर्षों में देशभर में कैंसर के मरीजों की संख्या 15.7 फीसदी तक बढ़ी है। 

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बेहतर हुई चिकित्सा प्रणाली

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा कैंसर पर जारी किए गए शोध में कहा गया है कि बढ़ी जागरुकता,  स्वच्छता और बेहतर चिकित्सा प्रणाली ने जहां एक तरफ कैंसर के इलाज को आसान बनाया है वहीं कुछ कैंसर के मरीजों में भी गिरावट देखी गई है। लेकिन बढ़ी जनसंख्या की वजह से मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 2012 में जहां देशभर में कैंसर के 10 लाख मामले सामने आए थे जो 2017-18 में बढ़कर 11.5 लाख हो गए। 

टाटा मेमोरियल अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के बढ़ते मामले चिंता का विषय नहीं रह गए हैं क्योंकि अब देश में चिकित्सा की बेहतर तकनीक मौजूद है। लोग जागरूक हुए हैं। 
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मुंह के कैंसर बढ़े मामले 

नए आंकड़ों के मुताबित कैंसर की वजह से मरने वालों की संख्या में भी 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कैंसर की वजह से 2012 में जहां सात लाख लोगों की मौत हुई थी वहीं 2017-18 में इससे मरने वालों की संख्या 7.8 लाख हो गई है।

आईसीएमआर कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ रवि मेहरोत्रा ने बताया कि होंठ और ओरल कैविटी कैंसर के मामले में पिछले छह सालों में 114 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जबकि स्तन कैंसर तेजी से शहरी जीवनशैली की देन के रूप में उभरा है और इसमें भी 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 2012 में 1.4 लाख मरीज थे जो 2018 में बढ़कर 1.6 लाख हो गए हैं।

 कम हुईं सर्विक्स कैंसर की मरीज
  
वहीं महिलाओं में तेजी से बढ़ती सर्विक्स कैंसर में जागरूकता की वजह से तेजी से गिरावट बी देखी गई है। डॉ मेहरोत्रा ने बताया कि बढ़ती जागरूकता, बढ़िया होता स्क्रीनिंग सिस्टम, बेहतरीन चिकित्सा पद्धती, देर से होती शादियां और स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता की वजह से सर्विक्स कैंसर के मामले तेजी से घटे हैं। इसमें 21 फीसदी की गिरावट देखी गई है। 2012 में करीब 1.23 लाख मामले दर्ज किए गए थे वह 2018 में घटकर महज 96 रह गए हैं। 

वहीं टाटा मेमोरियल सेंटर में इपीडेमीलोजी विभाग के अध्यक्ष डॉ राजेश दीक्षित ने बताया कि बढ़ी जागरूकता की वजह से कैंसर के मामलों में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि पहले 1 लाख की जनसंख्या में 17 मामले आते थे जो अब घटकर महज आठ रह गए हैं।   

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