पाकिस्तान को तगड़ा झटका देते हुए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने पाकिस्तानी कानूनी दल को पाकिस्तान में अवैध रूप से हिरासत में लिए गए कुलभूषण जाधव के छह मिनट की कथित अपराध कबूलनामे वाले वीडियो को सुनने से इंकार कर दिया।
पाकिस्तान का पक्ष रखने वाले प्रतिनिधिमंडल ने आईसीजे से इस वीडियो को देखने का अनुरोध किया जिसमें कथित तौर पर जाधव ने कबूला था कि वह जासूस हैं। लेकिन आईसीजे ने इस वीडियो को चलाने की अनुमति नहीं दी। यहां तक कि पाकिस्तान ने अपना पक्ष रखने के लिए दी गई 90 मिनट की समय सीमा को भी नहीं पूरा कर पाया।
भारत की तरफ से डॉ. दीपक मित्तल, हरीश साल्वे और काजल भट्ट ने दलीलें पेश की। हरीश साल्वे ने न केवल जाधव को फांसी से बचाने के लिए आईसीजे से जरूरी हस्तक्षेप की मांग की बल्कि पाकिस्तानी अदालत में सुनवाई को रद्द करने की बात भी रखी।
भारतीय वकील हरीश साल्वे ने आईसीजे के समक्ष पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए अपनी दलीलों में बताया कि किस तरह पाकिस्तान ने बुनियादी, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून की धज्जियां उड़ाईं। वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि भारत जाधव मामले पर आईसीजे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहा है।
आईसीजे ने अभी फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से बात करने के बाद ही इसकी तारीख तय की जाएगी। साल्वे ने आईसीजे से अपील की जाधव मामले पर पाकिस्तान की सैन्य अदालत के फैसले को अमान्य करार दिया जाए और फांसी की सजा पर तत्काल रोक लगाई जाए।