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Press Day: 'पारंपरिक मीडिया को उसकी सामग्री के इस्तेमाल के लिए उचित भुगतान मिलना चाहिए', वैष्णव का बड़ा बयान

Sat, 16 Nov 2024 10:07 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ashwini Vaishnaw: केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पारंपरिक मीडिया को कंटेंट निर्माण में किए गए प्रयासों का समुचित प्रतिफल दिया जाना चाहिए। यह जिम्मेदारी इस कंटेंट का इस्तेमाल करने वाले मध्यस्थ प्लेटफॉर्म की है। उन्हें पारंपरिक मीडिया के प्रयासों की भरपाई करनी चाहिए।
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अश्विनी वैष्णव - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मध्यवर्ती मंचों (मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स) को पारंपरिक मीडिया की सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए उन्हें उचित भुगतान करने की पैरवी की। उन्होंने मीडिया और समाज के सामने मौजूद चार प्रमुख चुनौतियों पर बात की। वैष्णव ने कहा कि पारंपरिक मीडिया आर्थिक पक्ष पर नुकसान झेल रहा है। इसकी वजह है कि खबरें तेजी से पारंपरिक माध्यमों से डिजिटल माध्यमों की ओर स्थानांतरित हो रही हैं। पारंपरिक मीडिया को कंटेंट निर्माण में किए गए प्रयासों का समुचित प्रतिफल दिया जाना चाहिए। यह जिम्मेदारी इस कंटेंट का इस्तेमाल करने वाले मध्यस्थ प्लेटफार्म्स की है। उन्हें पारंपरिक मीडिया के प्रयासों की भरपाई करनी चाहिए। 

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उन्होंने कहा कि पारंपरिक मीडिया में पत्रकारों की टीम बनाने, प्रशिक्षित करने, खबरों की सत्यता जांचने के लिए संपादकीय प्रक्रियाएं तैयार करने और विषय-वस्तु की जिम्मेदारी लेने के पीछे जो निवेश होता है, वह समय और धन दोनों के मुकाबले बहुत बड़ा है, लेकिन ये मंच अप्रासंगिक होते जा रहे हैं, क्योंकि प्रसार क्षमता के लिहाज से मध्यवर्ती मीडिया माध्यमों को इन पर बहुत अधिक बढ़त हासिल है। इस मुद्दे को हल करने की जरूरत है। सामग्री तैयार करने में पारंपरिक मीडिया मंच जो मेहनत करते हैं, उसकी भरपाई उचित भुगतान के जरिए की जानी चाहिए।
 


लोकतंत्र को बनाए रखने में मीडिया का योगदान अहम
राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दिए संबोधन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में मीडिया के योगदान और आपातकाल के ‘काले दिनों’ के दौरान लोकतंत्र को बनाए रखने में मीडिया के योगदान को स्वीकार किया।
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फेक न्यूज और गलत सूचना वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती
वैष्णव ने फेक न्यूज व गलत सूचना को वर्तमान में मीडिया और समाज की चार चुनौतियों के पहला स्थान दिया। वैष्णव ने कहा, यह न सिर्फ मीडिया के लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के लिए भी बड़ा खतरा है क्योंकि भरोसे को कम करता है। चूंकि प्लेटफार्म यह सत्यापित नहीं करते हैं कि क्या पोस्ट किया गया है, इसलिए व्यावहारिक रूप से सभी प्लेटफॉर्म पर झूठी और भ्रामक जानकारी बहुतायत में पाई जा सकती है। नतीजतन तो बेहद जागरूक नागरिक हैं वे भी इस गलत सूचना के जाल में फंस जाते हैं।
 
केंद्रीय मंत्री ने पूछा, सवाल यह है कि इन प्लेटफार्मों पर प्रकाशित सामग्री की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने बिचौलियों और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए उत्तरदायित्व से बचाने वाले ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान पर फिर से विचार करने की वकालत की। वैष्णव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर, एक ‘संरचना’ की प्रासंगिकता पर बहस चल रही है जो सुरक्षित हो। 1990 के दशक में जब इंटरनेट विकसित हो रहा था तब भी ऐसी ही संरचना की जरूरत महसूस हुई थी। उस वक्त डिजिटल माध्यम की उपलब्धता कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित थी। वे अधिकतर विश्वविद्यालय और शोध संस्थान थे।
 
कंटेंट निर्माण के लिए पारंपरिक मीडिया को मिले समुचित प्रतिफल
वैष्णव ने कहा, पारंपरिक मीडिया को कंटेंट निर्माण में किए गए प्रयासों का समुचित प्रतिफल दिया जाना चाहिए। यह जिम्मेदारी इस कंटेंट का इस्तेमाल करने वाले मध्यस्थ प्लेटफार्म की है। उन्हें पारंपरिक मीडिया के प्रयासों की भरपाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, डिजिटल माध्यम की आसान उपलब्धता के साथ आज स्थिति बदल गई है। यह बहुत आम और प्रचलित हो गया है। व्यावहारिक रूप से आप शहरों में हर व्यक्ति और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आबादी को देखते हैं, जिनके हाथों में अब मोबाइल फोन है और वे डिजिटल रूप से दुनिया तक पहुंच बना रहे हैं।
 
रचनाकारों के बौद्धिक संपता अधिकारों पर एआई का प्रभाव भी अहम चुनौती
मंत्री ने कहा, मीडिया और समाज के सामने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आर्टिफिशियल इंटेनिजेंस (एआई) का प्रभाव भी एक बड़ी चुनौती है। रचनाकारों, संगीतकारों, फिल्म निर्माताओं, लेखकों और लेखकों की निर्मित सभी सामग्री को एआई मॉडल से पचाया जा रहा है। ऐसे में रचनाकारों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का क्या होता है? उन मूल रचनाकारों के लिए क्या परिणाम हैं? क्या उन्हें उनके काम के लिए मुआवजा दिया जा रहा है? क्या उन्हें उनके काम के लिए स्वीकार किया जा रहा है? वैष्णव ने कहा, प्रौद्योगिकी में इस तरह के बदलावों के तहत, मूल सामग्री रचनाकारों के लिए सुरक्षा क्या है? यह केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक नैतिक मुद्दा भी है।
 
आजादी की लड़ाई व आपातकाल के संघर्ष में मीडिया के योगदान को करें याद
वैष्णव ने कहा, आइए हम पिछली शताब्दी में दमनकारी ताकतों से आजादी के हमारे दो बार के संघर्ष में प्रेस के योगदान को याद करके शुरुआत करें। पहला ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक चली लड़ाई थी। दूसरा, कांग्रेस सरकार के लगाए आपातकाल के काले वर्षों के दौरान लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई थी। मंत्री ने कहा, हमें इन संघर्षों को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि इतिहास में खुद को दोहराने की प्रवृत्ति होती है और जो लोग इतिहास को भूल जाते हैं, उन्हें फिर से उन्हीं चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

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