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ऐसे बनी प्रधान के इस्तीफे की सूरत: IB-शाह की रिपोर्ट से चिंतित थी सरकार, सफाई देने संघ गए पूर्व शिक्षा मंत्री

Sun, 26 Jul 2026 04:47 AM IST
न्यूज डेस्क हिमांशु मिश्र/जितेंद्र भारद्वाज

सार

नीट पेपर लीक आंदोलन को लेकर आईबी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ-भाजपा की अलग-अलग रिपोर्टों ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। रिपोर्टों में चेतावनी दी गई थी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन बेकाबू हो सकता है और विपक्षी एकता को भी नई ताकत मिल सकती है। इसके बाद सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की, केंद्रीय बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात कीं और हालात पर लगातार नजर रखी। 
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धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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चार दिन पहले तक केंद्र सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी बचाने के लिए पूरी तरह जुटी थी। लेकिन प्रधान के इस्तीफे से 24 घंटे पहले आईबी, गृह मंत्री अमित शाह और संघ-भाजपा की अलग-अलग रिपोर्टों ने नीट पेपर लीक आंदोलन को लेकर सरकार की चिंता बढ़ा दी थी।

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क्या था आईबी का सबसे बड़ा अलर्ट?
तीनों रिपोर्टों में साफ कहा गया था कि हालात संभालने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का आंदोलन पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। इनमें सबसे अहम आईबी की वह रिपोर्ट थी, जिसमें अंदेशा जताया गया था कि यदि अगले 48 घंटे के भीतर कोई समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन सरकार के हाथ से निकल सकता है। इसी दौरान गृह मंत्री अमित शाह की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि यदि समाधान नहीं निकला तो विपक्षी एकता फिर से मजबूत हो सकती है। वहीं, भाजपा-संघ की रिपोर्ट में आंदोलन के कई राज्यों में व्यापक रूप लेने की आशंका जताई गई। खुफिया इनपुट में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि रविवार और सोमवार तक समाधान नहीं निकला तो युवाओं का यह प्रदर्शन पूरी तरह बेकाबू हो सकता है।

रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्या बड़े कदम उठाए?
रिपोर्ट मिलने के बाद आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर ताबड़तोड़ फैसले लिए गए। राजधानी दिल्ली में केंद्रीय बलों की 45 कंपनियां तैनात की गईं। वहीं, आईबी के इनपुट के आधार पर 16 अतिरिक्त कंपनियों को विभिन्न राज्यों से दिल्ली बुलाकर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए।
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क्या छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था?
खुफिया इनपुट बता रहे थे कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा था। शुरुआत में सरकार का मानना था कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने के बाद छात्रों का गुस्सा शांत हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वांगचुक का अनशन खत्म होने के बावजूद प्रदर्शन और तेज हो गया तथा कई राज्यों में फैल गया।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में वांगचुक के अनशन को लेकर क्या कहा गया?
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री को जो रिपोर्ट सौंपी, उसमें विपक्षी एकता बहाल होने की आशंका के साथ खुफिया एजेंसियों के इनपुट भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल समाप्त होने की घोषणा का आंदोलन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।

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संघ की क्या राय थी और प्रधान किससे मिलने पहुंचे थे?
शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं, इसलिए इसे अधिक समय तक नहीं खींचा जाना चाहिए। वहीं, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को संघ के कुछ नेताओं से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा था।

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