तमिलनाडु की राजनीति के एक अहम अध्याय का शनिवार को समापन हो गया। पट्टाली मक्कल काची (PMK) के संस्थापक डॉ. एस. रामदास ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। अपने 88वें जन्मदिन पर उन्होंने पार्टी की कमान औपचारिक रूप से अपने बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. अनबुमणि रामदास को सौंप दी। इसके साथ ही पिता-पुत्र के बीच पिछले करीब 18 महीनों से चल रहा नेतृत्व विवाद भी समाप्त हो गया।
आखिर कौन हैं एस. रामदास?
डॉ. एस. रामदास पेशे से चिकित्सक रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ग्रामीण इलाकों में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने से की। वर्ष 1980 में उन्होंने वन्नियार समुदाय के अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर वन्नियार संगम की स्थापना की। इसी आंदोलन ने बाद में उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में एक प्रभावशाली सामाजिक नेता के रूप में स्थापित किया।
कैसे बना सामाजिक आंदोलन एक मजबूत राजनीतिक दल?
वर्ष 1989 में डॉ. रामदास ने पट्टाली मक्कल काची (PMK) की स्थापना की। वन्नियार समुदाय के सामाजिक आंदोलन को उन्होंने एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल में बदल दिया, जिसने लगभग चार दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आरक्षण, पूर्ण शराबबंदी, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के अधिकार जैसे मुद्दे हमेशा उनकी राजनीति के केंद्र में रहे।
क्यों लिया राजनीति से संन्यास?
टिंडिवनम के पास कोनेरिकुप्पम स्थित सरस्वती कॉलेज में आयोजित अपने 88वें जन्मदिन समारोह में डॉ. रामदास ने कहा कि वह अब 'राजनीतिक संन्यास' ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे और न ही पार्टी के फैसलों में हस्तक्षेप करेंगे। हालांकि, वह अपने शुभचिंतकों से मिलते रहेंगे और उनकी कुशलक्षेम पूछते रहेंगे।
क्या बेटे अनबुमणि के हाथों में पूरी जिम्मेदारी होगी?
डॉ. रामदास ने कहा कि अब पार्टी और राजनीतिक गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी उनके बेटे डॉ. अनबुमणि रामदास संभालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अनबुमणि की पत्नी सौम्या भी उनका सहयोग करेंगी। हाल ही में हुए 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अनबुमणि ने एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ गठबंधन किया था। उनकी पत्नी सौम्या ने धर्मपुरी सीट से जीत दर्ज की। इसके अलावा पीएमके ने गिंगी, जयनकोंडम और विक्रवांडी सीटों पर भी जीत हासिल की।
क्या स्वास्थ्य भी संन्यास की एक वजह बना?
अपने संबोधन में डॉ. रामदास ने बताया कि वह इन दिनों वर्टिगो (चक्कर आने की बीमारी) से पीड़ित हैं। उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे उनसे मिलने जरूर आएं, लेकिन अब राजनीति पर चर्चा न करें। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनके और समर्थकों के बीच का रिश्ता हमेशा पहले जैसा ही रहेगा।
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क्या राजनीति से दूर होने के बाद भी बनी रहेगी उनकी भूमिका?
हालांकि डॉ. रामदास ने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया है, लेकिन उनके बेटे अनबुमणि रामदास ने स्पष्ट किया कि पीएमके और वन्नियार संगम दोनों उनके मार्गदर्शन और सलाह में आगे भी काम करते रहेंगे। ऐसे में सक्रिय राजनीति से दूरी के बावजूद संगठन पर उनका नैतिक प्रभाव बना रहेगा।