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भारतीय वायुसेना के लापता एन-32 की तलाश फिर शुरू, खोज का दायरा बढ़ाया गया

Thu, 06 Jun 2019 06:57 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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AN-32 विमान (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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भारतीय वायुसेना ने लापता एएन-32 विमान की तलाश फिर शुरू की है। अब खोज का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है और इसके लिए चीता हेलिकॉप्टर जैसे छोटे हेलिकॉप्टर को मिशन में शामिल किया गया है जिससे ऐसे स्थानों पर पहुंचा जा सके जहां बड़े हेलिकॉप्टर से या पैदल नहीं जाया जा सकता। इससे पहले भारतीय वायुसेना और भारतीय सेना के हेलिकॉप्टरों द्वारा की जा रही खोज घाटियों में मौसम के चलते प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई थी। यह खोज रात तक जारी रहेगी। 

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वायु सेना का एएन-32 विमान सोमवार (तीन जून) को अरुणाचल प्रदेश के मेंचुका के पास लापता हो गया था। विमान ने असम के जोरहाट से चीन की सीमा के पास मेंचुका के लिए उड़ान भरी थी। सोमवार दोपहर को उड़ान भरने के करीब 33 मिनट बाद विमान लापता हो गया, जिसमें 13 लोग सवार थे। भूतल पर नियंत्रण कर रहे अधिकारियों से विमान का आखिरी संपर्क दोपहर 1 बजे हुआ।एएन-32 को तलाशने के लिए नौसेना के लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान को भी तैनात किया गया है।

विमान की तलाश में युद्धस्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इसकी खोज में वायुसेना के विमानों के साथ नौसेना व थलसेना के हेलीकॉप्टर के बेड़े जुटे हैं। इसके साथ ही इसरो के कार्टोसैट और रीसैट (रडार इमेजिंग सैटेलाइट) की मदद भी ली जा रही है। इसके बावजूद वायुसेना को अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

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तीन साल पहले भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ था एएन-32

वायुसेना का एएन-32 विमान तीन साल पहले 22 जुलाई, 2016 को हादसे का शिकार हो गया था। तब यह विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा था और इसमें 29 लोग सवार थे। उड़ान भरने के एक घंटे बाद बंगाल की खाड़ी से यह विमान लापता हो गया था। विमान को ढूंढने में वायुसेना ने एक माह लंबा खोजी अभियान चलाया था, लेकिन विमान का कोई पता नहीं चल सका था।

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1980 में हुआ था वायुसेना में शामिल

एएन-32 रूस में बना ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है और वायुसेना बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल करती है। इसे 1980 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। समय-समय पर इसे अपग्रेड किया जाता रहा है, लेकिन जो विमान लापता हुआ है वह अपग्रेड वर्जन नहीं था। वायुसेना इन विमानों का ज्यादातर इस्तेमाल कम और मध्यम हवाई दूरी के लिए सैन्य साजो सामान पहुंचाने, आपदा के समय और जवानों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए करती है।

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