भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने 2019 में पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए अभियान का जिक्र करते हुए भारतीय वायुसेना की ताकत बताई। उन्होंने कहा कि 2019 में बालाकोट हमले ने यह दिखाया है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो 'नो वॉर, नो पीस' परिद्रश्य में भी देश की वायुसेना की ताकत का इस्तेमाल प्रभावी ढ़ंग से किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने वायुसेना की ताकत बताते हुए कहा कि इसके दम पर परमाणु हमले के दौरान भी हालात को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
इस दौरान वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि लचीलेपन और बेजोड़ सटीक मारक क्षमता के कारण वायु सेना आपातकाल में पहला विकल्प बनती है। इस दौरान बिना चीन-पाकिस्तान का नाम लिए उन्होंने कहा कि हमारे विरोधियों की प्रकृति को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे पास किसी भी हमले का जवाब देने के लिए विकल्पों की भरमार हो गई है। एयर चीफ मार्शल चौधरी ने यह बातें 'एयरोस्पेस पावर: पिवोट टू फ्यूचर बैटलस्पेस ऑपरेशंस' पर एक सेमिनार में बोलते हुए कहीं।
गौरतलब है कि भारत के युद्धक विमानों ने फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर बमबारी की थी।
अपने संबोधन में उन्होंने सुरक्षा को मजबूत करने के लिए और उपायों पर भी चर्चा की। एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए यह आवश्यक है कि वह पर्याप्त सैन्य शक्ति स्थापित करे। साथ ही इसमें सूचना का प्रभुत्व सुनिश्चित हो। जिससे जरूरत पड़ने पर हमारे पास जबरदस्त और कई प्रतिक्रिया विकल्प हों।
उन्होंने कहा कि हवाई क्षेत्र को नियंत्रित करने में सक्षम होना भविष्य में और इसे हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस शक्ति की खासियत लीडरशिप को सही रणनीति बनाने की क्षमता देती है। एयरोस्पेस पॉवर के क्षेत्र में भारत की बढ़त को देखते हुए भविष्य में युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना अहम भूमिका निभा सकती हैा एयर चीफ मार्शल चौधरी ने यह भी कहा कि सीएमओएस (पूरक धातु ऑक्साइड अर्धचालक) सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मानव रहित टीमिंग सहित प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता है। अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान "कल के युद्ध" लड़ने में एक निर्णायक कारक साबित होंगे।