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'आपका लेक्चर नहीं सुनूंगी': अभिजीत सरकार हत्याकांड से जस्टिस शुभ्रा घोष ने खुद को किया अलग, इस कारण हुईं नाराज

Sat, 26 Jul 2025 05:36 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता

सार

मई  2021 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद  भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव किया था। इसके तुरंत बाद ही भाजपा नेता अभिजीत की हत्या कर दी गई थी। उनके भाई विश्वजीत सरकार ने तृणमूल समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया था। इसी मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायाधीश शुभ्रा घोष सुनवाई कर रही थीं।
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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कलकत्ता हाईकोर्ट की न्यायाधीश शुभ्रा घोष ने शुक्रवार को कांकुड़गाछी के भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार हत्याकांड से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अदालत में तृणमूल कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंद्योपाध्याय की तीखी दलीलों और टिप्पणियों से नाराज होकर जस्टिस घोष ने कहा, आपका लेक्चर मैं नहीं सुनूंगी।

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मामला पुलिस अधिकारी रत्ना चक्रवर्ती की अंतरिम जमानत याचिका से जुड़ा था, जिन्हें हाल ही में अभिजीत सरकार की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है। कल्याण ने अदालत में बार-बार अंतरिम जमानत की मांग की और सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि चार साल बाद अचानक गिरफ्तारी क्यों की गई। जस्टिस घोष ने कहा कि वे आगामी सोमवार से 15 दिन के लिए सर्किट पीठ पर रहेंगी, इसलिए इस मामले की पूरी सुनवाई तुरंत संभव नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि जल्दी सुनवाई चाहिए तो याचिकाकर्ता किसी और पीठ के समक्ष जा सकते हैं। इस पर कल्याण ने एक अन्य जज का नाम लेते हुए कहा, ऐसा व्यवहार वे भी करते हैं। हमें जजों की कृपा पर निर्भर रहना पड़ता है, यही दुर्भाग्य है।

इस टिप्पणी पर जस्टिस शुभ्रा घोष बेहद नाराज हो गईं और कहा, अदालत को लेकर लगातार अनुचित टिप्पणी की जा रही है। अब सहन करने की सीमा पार हो रही है। कोर्ट इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगा। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब यह मामला नहीं सुनेंगी। 
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क्या है मामला
मई  2021 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद  भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव किया था। इसके तुरंत बाद ही भाजपा नेता अभिजीत की हत्या कर दी गई थी। उनके भाई विश्वजीत सरकार ने तृणमूल समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया था। जब यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में गया तो अदालत ने इसकी जांच सीबीआई से कराने के लिए निर्देश दिया। जांच के दौरान सीबीआई ने मामले में फरार व्यक्तियों की सूचना देने वाले को 50 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। हाल ही में सीबीआई ने मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। 
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