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'मैं आपको असली मर्द का बेटा मानूंगा': पूर्व वित्त सचिव के दावे पर भड़के सांसद निशिकांत, मानहानि का किया मुकदमा

Mon, 21 Sep 2026 12:40 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, नई दिल्ली।

सार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग के बीच विवाद बढ़ गया है। दुबे ने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है। विवाद गर्ग के उस दावे से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दुबे के साथ ऑफिस में बैठक का जिक्र किया था। आइए जानते हैं कि निशिकांत दुबे ने क्या कहा? 
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निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच चल रहे विवाद अब और बढ़ा गया है। उन्होंने घोषणा की है कि उन्होंने इस रिटायर्ड अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मामला उनके बीच हुई एक आधिकारिक बैठक के दावों को लेकर है।

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यह विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब गोड्डा के सांसद ने सोशल मीडिया पर एक तीखी पोस्ट में गर्ग की आलोचना की। इसके साथ ही इस बात से इनकार किया कि वे सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान गर्ग के दफ्तर गए थे।

निशिकांत दुबे ने क्या कहा? 
सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा, 'पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग की इस बदतमीजी का जवाब देने का मैंने फैसला किया है। मैंने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज कराया है, क्योंकि उन्होंने अपने ऑफिस में मेरे साथ हुई एक मीटिंग का जिक्र किया है। सुभाष, आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं 2009 में सांसद बना था, और तब से लेकर आज तक, मैं भारत सरकार के किसी भी ऑफिस में कभी नहीं गया, क्योंकि प्रोटोकॉल के हिसाब से भारत सरकार का सचिव सांसद से नीचे के ओहदे पर होता है। 
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 'आपको असली मर्द का बेटा मानूंगा'
उन्होंने आगे कहा कि,'दूसरी बात, 2009 से लेकर आज तक, मैंने कभी भी किसी के तबादले या पोस्टिंग के लिए कोई चिट्ठी नहीं लिखी है। और तो और, अगर आपका कोई दोस्त आपको मेरी किसी चिट्ठी या ऑफिस मीटिंग के बारे में जानकारी देता है, तो मैं आपको असली मर्द का बेटा मानूंगा। सुभाष, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को डुबो दिया है। उनके लिए अब जेल ही एकमात्र रास्ता है। 

कैसे शुरू हुआ यह विवाद? 
बता दें कि इस नई कानूनी कार्रवाई से उस सार्वजनिक विवाद में एक बड़ा मोड़ आ गया है, जो तब फिर से शुरू हुआ था जब गर्ग ने सरकार के हालिया जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों (जो 7.8 प्रतिशत बताए गए थे) की विश्वसनीयता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। गर्ग का दावा था कि बेसलाइन करंट-प्राइस जीडीपी डेटा में किए गए बदलावों ने आर्थिक विस्तार की वास्तविक दर को छिपा दिया है। उनका कहना था कि अगर पिछले साल जारी किए गए मूल अनुमानों के आधार पर मापा जाए, तो नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ काफी कम होगी।

इसके बाद गर्ग की आलोचनाओं के जवाब में, दुबे ने एक पुराना विवाद फिर से छेड़ दिया। उन्होंने वह चिट्ठी शेयर की जो उन्होंने मार्च 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी थी। उस समय, गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग में सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे। यह पद उन्होंने मार्च 2019 में फाइनेंस सेक्रेटरी बनने से पहले संभाला था।

2018 के पत्र में क्या था? 
2018 के पत्र में, दुबे ने प्रधानमंत्री से गर्ग के व्यापक आर्थिक ढांचे की समीक्षा करने का आग्रह किया था। इसके साथ ही चेतावनी दी थी कि राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, कड़े राजकोषीय घाटे के लक्ष्य और राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) ढांचे का कड़ाई से पालन करने पर अत्यधिक जोर राष्ट्रीय विकास में बाधा हो रहा है। 

दुबे ने तर्क दिया था कि भारतमाला, सागरमाला, औद्योगिक गलियारे और उड़ान के तहत क्षेत्रीय हवाई मार्ग विस्तार जैसी प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं सहित महत्वपूर्ण पूंजीगत खर्च के लिए राजकोषीय कम खर्च करने के बजाय मजबूत सार्वजनिक वित्तपोषण और लचीलेपन की आवश्यकता है।

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