गुजरात में पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने कहा है कि जमानत दिए जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें उदयपुर में नजरबंद कर रखा है। लेकिन वो यहीं से आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने आंदोलन की रणनीति को लेकर कहा कि जब नागपुर से पूरा देश चल सकता है तो क्या उदयपुर से आंदोलन नहीं चल सकता?
गुजरात में शुरू हुए पाटीदार आंदोलन को गुरुवार को एक साल पूरे हो जाएंगे।लेकिन जिस सरगर्मी से ये आंदोलन शुरू हुआ था अब इसमें कमी आई है और आंदोलन में भी बिखराव की ख़बरें आ रही हैं।हार्दिक पटेल ने अदालत के निर्देश पर राज्य से बाहर राजस्थान के उदयुपर में अपना अस्थायी ठिकाना बना रखा है।लेकिन हार्दिक पटेल का कहना है, "मैं नौ महीने जेल में रहा और अभी छह महीने के लिए गुजरात से बाहर हूँ।
जब जेल से बाहर निकला तबसे मुझसे 50 लाख लोग जुड़े हैं। आंदोलन चल रहा है बस हम दिखा नहीं रहे हैं। जब हम गुजरात जाएंगे तो आप देख पाएंगे कि कितने बड़े पैमाने पर हमसे लोग जुड़े हुए हैं।" पाटीदार आंदोलन अभी धीमा है और हार्दिक का कहना है कि इसे ग्रामीण स्तर पर चलाया जा रहा है और धार्मिक यात्राओं के जरिए लोगों को जोड़ने की कोशिश हो रही है।
वो कहते हैं, "हम सवर्ण समाज में जितने भी राजपूत, पटेल, ब्राह्मण, स्वामी हैं, उन सबको जोड़ना चाहते हैं। आने वाले दिनों में हम दिखाएंगे कि हमारी ताकत कितनी है।" हालांकि आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि जो चंदा इकट्ठा हुआ, उसका दुरुपयोग हुआ है। लेकिन हार्दिक पटेल का कहना है कि हमारे आंदोलन को तोड़ने की बड़ी कोशिशें की जा रही हैं।
हमने करोड़ों कमाए तो करा लें इनकम टैक्स की जांच
हार्दिक
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वो कहते हैं, "अगर हमने करोड़ों रुपये कमा लिये हैं तो इन लोगों को इनकम टैक्स विभाग से जांच कराने का आदेश दे देना चाहिए। दूसरी बात ये है कि जिन लोगों ने दिया वो नहीं बोल रहे हैं, यानी किसी ने नहीं दिया।" ऐसी खबरें हैं कि हार्दिक पटेल को कुछ लोगों ने चिट्ठी लिखकर पूछा था कि एक साल पहले के मुकाबले उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी कैसे हो गई।
जबकि हार्दिक का कहना था, "मैं मध्यवर्गीय परिवार से आता हूं। ना मैं बहुत गरीब हूं और ना ही बहुत अमीर। मैं किसान का बेटा हूं और मेरे पास 10 एकड़ जमीन है। मैं इसमें कमा खा सकता हूं। ये लड़ाई पूरे समाज की है और समाज ने आरोप लगाने वालों को जवाब दे दिया है।" जब ये आंदोलन शुरू हुआ तो उन पर देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया था। अब जब उन्हें जमानत मिल चुकी है लेकिन उन्हें राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही आंदोलन के अन्य अगुवा लोगों को भी अपनी जगहों से न निकलने के लिए कहा गया। ऐसे में आंदोलन का क्या होगा? हार्दिक पटेल का कहना है कि 'नागपुर में बैठे-बैठे देश चल सकता है तो उदयपुर में बैठे-बैठे आंदोलन क्यों नहीं चल सकता।'राज्य निर्वासन के बारे में उनका कहना था कि सरकार ने उन्हें 'उदयपुर में नजरबंद कर रखा है, जबकि ज़मानत के आदेश में ये कहीं नहीं लिखा गया है।'वो कहते हैं, "नजरबंदी के खिलाफ जोधपुर की अदालत में याचिका दायर की है और अगले दो तीन दिन में इस बारे में कोई स्थिति साफ हो पाएगी।"