सभी दल अपने मतदाताओं के बीच यह प्रचारित करने की कोशिश करेंगे कि उनके साथ पूरे देश की पार्टियां एकजुट हैं। ऐसे में सरकार में बदलाव की मंशा रखने वाले सभी मतदाता गठबंधन की पार्टियों के झंडे के नीचे अलग-अलग राज्यों में एकत्र हो जाएंगे। गठबंधन को इसका लाभ मिल सकता है।
चूंकि, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे सभी राज्यों के मतदाताओं की प्राथमिकता में होते हैं, और संसद में इंडिया गठबंधन के सभी विपक्षी दल काले कपड़ों में सरकार का विरोध कर रहे हैं, ये अपने राज्यों में मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर सकते हैं कि जनता के मुद्दों के लिए सभी लोग एक हैं। ऐसे में अलग-अलग दल होने के बाद भी वे एक दूसरे को सहयोग दे सकते हैं। एक ही राज्य में दो या ज्यादा दलों के होने पर सीटों में बेहतर तालमेल होने पर इसका ज्यादा असर दिखाई पड़ सकता है।
एकजुटता बनाए रखनी होगी
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस मनोवैज्ञानिक बढ़त का लाभ लेने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट रखना समय की आवश्यकता है। केंद्र सरकार के विरुद्ध अविश्वासमत का प्रस्ताव लाने में जिस तरह कांग्रेस ने केवल अपने सांसद गौरव गोगोई को आगे कर दिया, उससे इंडिया के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ी है। यदि विपक्ष के सभी 26 सांसदों की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव गया होता, तो इसका कहीं ज्यादा प्रचार होता और उसका लाभ विपक्ष को मिलता। कांग्रेस को इस तरह की गलतफहमी पैदा होने से बचने की कोशिश करनी चाहिए।