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मैं भी हिंदू हूं पर मैं किसी से नहीं डरता: चीफ जस्टिस

Tue, 17 Jan 2017 10:27 PM IST
राजीव सिन्हा/ नई दिल्ली
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भारत के प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहड़ ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान कहा कि मैं भी हिन्दू हूं, लेकिन मैं किसी से नहीं डरता। प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब 10वीं बार गोहत्या पर रोक लगाने की गुहार करने वाले याचिकाकर्ता ने कहा कि हिन्दू अदालत में आने से डरते हैं, वह इन बातों में नहीं पडना नहीं चाहते।
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प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता बाल राम बाली से कहा कि अदालत आने में डरने की बात क्या है। आखिर किसी के पास तथ्य है तो उसे क्यों डरना चाहिए। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि आप दसवीं बार यह याचिका लेकर आए हैं, पहले ही आपकी तमाम याचिका खारिज हो चुकी है। 

इस याचिका में भी कुछ नया नहीं है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि 1996 में संविधान पीठ ने इस संबंध में गलत आदेश पारित किया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि संविधान पीठ के फैसले में इस बात को गलत रिकॉर्ड किया गया है कि पूर्व में हिन्दू धर्म केलोग गाय और सूअर का मांस खाते थे। 
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वेद या धार्मिक ग्रंथों में नहीं लिखी हैं ऐसी बातें

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वेद या धार्मिक ग्रंथों में ऐसी बातें नहीं लिखी हैं। लेकिन प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहड़ और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आपकी याचिकाएं पहले भी कई बार खारिज की जा चुकी है। 

पीठ ने याचिकाकर्ता बाली को चेतावनी दी कि अगर वह फिर से इस तरह की याचिका दायर करेंगे तो उन्होंने याचिका के साथ 50 हजार रुपये का ड्राफ्ट की संलग्न करना होगा। मालूम हो कि याचिकाकर्ता बाली पर अदालत की अवमानना का मामला भी चल चुका है, हालांकि बाद में अवमानना की कार्यवाही निरस्त कर दी गई थी। 
 
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अदालत में सियासी दलील नहीं

डेमो पिक
जम्मू एवं कश्मीर के एक बुजुर्ग अब्दुल गनी बट की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहड़ बेहद निराले अंदाज में दिखे। पूरी सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से हिन्दी में संवाद किया। 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की दलीलों पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा आप नेता की तरह बात कर रहें हैं। हम अदालत में सियासी दलीलें नहीं चाहते हैं। आपने याचिका में जो प्रार्थना की है आप उस पर बातें करें। तब हम याचिका पर सुनवाई करेंगे और पूरी सुनवाई करेंगे। चाहे सात क्यों न बज जाए, हम यहां से नहीं हिलेंगे। यह हमारा वायदा है। हालांकि याचिकाकर्ता की तैयारी पूरी न होने पर पीठ ने सुनवाई मंगलवार के लिए टाल दी। 
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