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Rg kar Case: पीड़िता को न्याय दिलाने और सुरक्षा की मांग को लेकर आमरण अनशन जारी, दो और डॉक्टर भी हुए शामिल

Sat, 12 Oct 2024 01:32 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कोलकाता

सार

कोलकाता के आरजी कर कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के साथ बर्बरता के बाद हत्या मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए एक सप्ताह से आमरण अनशन पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स के साथ अब दो अन्य डॉक्टर भी शामिल हो गए हैं। 
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डॉक्टर्स का आमरण अनशन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए बर्बरता मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने और कई अन्य मांग को लेकर एक सप्ताह से छह जूनियर डॉक्टर आमरण अनशन पर बैठे है। वहीं, आज दो और जूनियर डॉक्टर भी इस अनशन में शामिल हो गए। जूनियर डॉक्टर्स के आमरण अनशन के उद्देश्य की बात करें तो वे आरजी कर अस्पताल में हत्या की शिकार महिला चिकित्सक के लिए न्याय की मांग के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी अनशन पर हैं। बता दें कि छ डॉक्टर्स के साथ शनिवार को रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान के परिछोय पांडा और कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की अलोलिका घोरुई भी इस अनशन में शामिल हुए। 
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स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी डटे है डॉक्टर
5 अक्तूबर से आमरण अनशन पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स के स्वास्थ्य को लेकर भी कई सारी खबरें इन दिनों सामने आईं हैं। उनके साथी चिकित्सकों ने भी कहा कि अनशन के कारण उनकी तबीयत खराब हो रही है। वे 5 अक्तूबर से ही भूख हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों में से एक डॉ. देबाशीष हलदर ने कहा वे बहुत कमजोर हो गए हैं। उनके पेशाब में क्रिएटिनिन की मौजूदगी बढ़ गई है। सात दिनों के उपवास से निश्चित रूप से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, लेकिन इससे न्याय के लिए उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

इसके साथ ही इस मामले में बिगड़ते डॉक्टर के हालात को देखते हुए एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा कि उन पर उपचार का असर हो रहा है, उनके स्वास्थ्य में सुधार दिख रहा है, लेकिन पूरी तरह से ठीक होने में उन्हें कुछ और दिन लगेंगे। 6 अक्तूबर को अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल हुए महतो को गुरुवार को तबीयत बिगड़ने के बाद आरजी कर अस्पताल ले जाया गया। 
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पुलिस पर दबाव डालने का आरोप
एक सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स के हौसले बुलंद दिख रहे है। राज्य सरकार से सुरक्षा और पीड़िता को न्याय दिलाने के रास्ते में आज उनके आमरण अनशन की बाते तेज हो गई है। इसके साथ ही अनशन पर बैठे दो जूनियर डॉक्टरो ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि पुलिस उनके परिवार के सदस्यों पर दबाव डाल रही है कि वे उन्हें अनशन से हटने के लिए मना लें।  
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