कर्नाटक के हुबली में हिंसा के सिलसिले में 89 लोगों को गिरफ्तार किए जाने के करीब सालभर बाद उनमें से कई के परिवारों ने दावा किया है कि उनके रिश्तेदार ‘निर्दोष’ हैं और वे अनपढ़ होने के कारण उनकी जमानत कराने में असमर्थ हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि आरोपियों को रिहा नहीं किया जाता है तो वे 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
पिछले साल अप्रैल में एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हिंसा भड़क गई थी जिसके बाद 89 लोग गिरफ्तार किए गए थे। उग्र भीड़ ने थाने और हनुमान मंदिर पर हमला किया था। जिसे लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हिंसा भड़क उठी थी, वायरल पोस्ट में डिजिटल ढंग से छेड़छाड़ कर एक मस्जिद के ऊपर एक भगवा ध्वज को दिखाया गया था।
जो लोग इस हिंसा के सिलसिले में अब भी जेल में हैं उनमें से कुछ के परिवारों का दावा है कि उनके बच्चे एवं रिश्तेदार बेगुनाह हैं और उनकी हिंसा में कोई भूमिका नहीं थी। कुछ स्थानीय निवासियों ने कहा, जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, उनमें से ज्यादातर को पुलिस ने मनमाने ढंग से पकड़ा था। हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। हमें अपने बच्चों को छुड़ाने के लिए जमानत का आवेदन देने या अदालत से संपर्क करने के तौर तरीके की जानकारी नहीं है।
हुबली के नवा आनंद नगर की मुमताज ने कहा कि वह अपने बच्चे से सालभर से मिल नहीं पाई है। मुमताज का बेटा उन लोगों में शामिल है जो फिलहाल इस हिंसा के सिलसिले में कलबुर्गी जेल में बंद हैं। मुमताज ने कहा, मेरा बेटा हुबली में ऑटोरिक्शा चलाया करता था। पुलिस उसे गिरफ्तार कर कलबुर्गी जेल ले गई और तब से मैंने उसकी आवाज नहीं सुनी। एक साल से अधिक समय बीत गया। मेरा बेटा बेगुनाह है। जब तक मेरे बेटे को जेल से रिहा नहीं किया जाता, तब तक मैं वोट नहीं डालूंगी।
हुबली में जो घटना घटी थी वह कथित सोशल मीडिया पोस्ट का परिणाम थी। अन्य लोगों ने इस पर ऐतराज करते हुए पुलिस में शिकायत की थी। जिस व्यक्ति ने यह पोस्ट किया था, उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था।
आरोपियों के परिजनों के मुताबिक, जो लोग जेल में बंद हैं उन्होंने अपने समुदाय के नेताओं को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे उनका संदेश केंद्र तक पहुंचाएं और उन्हें जल्द से जल्द रिहा करें। नवा आनंद नगर की शमशाद ने कहा, मेरे तीन बेटों को गिरफ्तार कर लिया गया था और उनमें से एक पिछले 11 महीनों से जेल में है। इस घटना में मेरे बच्चे दोषी नहीं थे। जब तक मेरा बेटा रिहा नहीं हो जाता, मैं अपना वोट नहीं डालूंगी। उन्होंने कहा कि हिंसा के बाद नवा आनंद नगर इलाके से करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले के बारे में बोलते हुए कर्नाटक एडीजीपी आलोक कुमार ने कहा कि जमानत देना मामले की गंभीरता और साक्ष्य की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। आलोक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कई लोगों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियुक्तों को जमानत देना मामले की गंभीरता, कानून की सीमा और साक्ष्य की गुणवत्ता पर निर्भर करता है, चाहे वह वीडियो में हो या तस्वीरों में।
इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था कि हुबली हिंसा के संबंध में निर्दोष लोगों को पकड़ा गया था। उन्होंने कहा था कि गिरफ्तारी सबूतों के आधार पर की गई थी।