देश में पुलिस आधुनिकीकरण की प्रक्रिया कछुआ चाल से चल रही है। कई राज्य तो इसमे काफी पीछे चल रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न प्रदेशों को इसके लिए आर्थिक मदद दी जाती है, लेकिन पैसा होने के बावजूद कई राज्य उसे खर्च ही नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले में बड़े राज्यों का हाल तो हैरान करने वाला है।
जम्मू-कश्मीर में मात्र 9 फीसदी पैसा खर्च
जम्मू-कश्मीर में पुलिस आधुनिकीकरण के लिए जारी हुआ बजट बहुत कम इस्तेमाल किया गया है। साल 2017 से लेकर 2020 तक जम्मू-कश्मीर को 120.89 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, लेकिन इसमें से केवल 10.82 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके। यानी 8.95 फीसदी राशि खर्च की गई।
झारखंड, मणिपुर, महाराष्ट्र के भी बुरे हाल
झारखंड में भी केवल 13.22 फीसदी बजट खर्च किया गया है। मणिपुर में 13.83, महाराष्ट्र में 14.97 और केरल में 20.80 फीसदी बजट खर्च हुआ है।
गोवा ने पेश की मिसाल, शत प्रतिशत खर्च किया
दूसरी तरफ गोवा है, जिसने पुलिस आधुनिकीकरण के लिए जारी बजट की राशि 100 प्रतिशत खर्च कर मिसाल पेश की है। त्रिपुरा ने भी इस राशि का बेहतर इस्तेमाल किया है। त्रिपुरा को जो राशि मिली थी, उसका 90.64 फीसदी हिस्सा खर्च हुआ है।
उत्तरप्रदेश में 85 फीसदी राशि खर्च हुई
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017-18, 2018-19 व 2019-20 के लिए केंद्र द्वारा विभिन्न राज्यों को पुलिस आधुनिकीकरण के लिए राशि स्वीकृत की गई थी।
उत्तरप्रदेश में इस राशि की इस्तेमाल 85.27 प्रतिशत हुआ है। तीन वर्षों में उत्तरप्रदेश को पुलिस की विभिन्न योजनाओं के लिए 211.68 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें से 180.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
राजस्थान को तीन वर्षों में 130.25 करोड़ रुपये दिए गए थे। इसमें से 112.52 करोड़ रुपये खर्च हो सके। यानी जारी हुई राशि का 86.38 प्रतिशत खर्च किया गया है।छत्तीसगढ़ में 77.39 प्रतिशत और बिहार में 61.06 फीसदी राशि का इस्तेमाल किया गया है।
बंगाल, मप्र, बिहार, गुजरात भी रहे पीछे
पश्चिम बंगाल में पुलिस आधुनिकीकरण पर 21.68 फीसदी राशि खर्च की गई है। इस राज्य को केंद्र ने 142.4 करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें से 30.88 करोड़ रुपये खर्च हो सके हैं।
मध्यप्रदेश में 21.48 प्रतिशत और गुजरात में 27.49 प्रतिशत राशि खर्च की गई है। तमिलनाडु में 35.26 प्रतिशत राशि खर्च हुई है। पंजाब में 24.01, हरियाणा में 34.28 व अरुणाचल प्रदेश में 29.43 प्रतिशत राशि खर्च की गई है।
गृह राज्यमंत्री रेड्डी बोले-आधुनिकीकरण सतत प्रक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री जी.किशन रेड्डी के अनुसार, पुलिस बलों का आधुनिकीकरण एक सतत और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। भारत सरकार 'पुलिस आधुनिकीकरण' के लिए राज्यों को सहायता स्कीम के तहत आर्थिक मदद प्रदान करती है।
खरीदे जा सकते हैं ये संसाधन
केंद्र सरकार की स्कीम में राज्य सरकारों को असॉल्ट राइफलें, मानव रहित हवाई वाहनों 'यूएवी' नाइट विजन डिवाइस 'एनवीडी' सीसीटीवी निगरानी प्रणाली व बॉडी वोर्न कैमरा जैसे निगरानी उपकरण खरीदने के अलावा आसूचना और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय मदद दी जाती है। राज्य सरकारें अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार, प्रस्ताव शामिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।
डिजिटल प्रौद्योगिकी की ओर बढ़ रहे राज्य
राज्यों ने केंद्र को सूचित किया है कि वे संचार के मामले में एनालॉग से डिजिटल प्रौद्योगिकी की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं। फोरेंसिक लैब का अपग्रेडेशन किया जा रहा है।जांच के क्षेत्र में आटोमैटिक फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम, 3डी क्राइम सीन स्कैनर आदि नई तकनीक अपनाई जा रही हैं। साथ ही आधुनिक हथियारों से भी पुलिस को लैस किया गया है। केंद्र द्वारा जिस स्कीम के तहत राज्यों को सहायता दी जाती है, उसके कार्यनिष्पादन का समय समय पर मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार बीपीआरएंडडी का सहयोग लेती है। इस प्रक्रिया में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की अंब्रेला स्कीम की योजनाओं के संबंध में नीति आयोग द्वारा शुरु किए गए मूल्यांकन अध्ययन भी शामिल किए जाते हैं।