बतौर जगमोहन सिंह, राकेश टिकैत को यह बात समझा दी गई है कि वे अब आंदोलन को कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंधप्रदेश, बिहार, उत्तर पूर्व, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, राजस्थान और दूसरे प्रदेशों तक ले जाएं। वहां के किसानों को अपने साथ जोड़ें। केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस के माध्यम से किसान नेताओं पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है, इस बाबत सरदार जगमोहन सिंह ने कहा, ये बात सही है। अब पुलिस ज्यादा ही परेशान करने लगी है।उन लोगों को गिरफ्तार कर रही है, जिन्होंने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया। खैर, इस बाबत हम पूरी तरह सचेत हैं। हमारे पास वकीलों की एक बड़ी एवं अनुभवी टीम है।
शुक्रवार को भी हमने छह लोगों की जमानत कराई है। बेगुनाह लोगों को पुलिस की ज्यादती का शिकार नहीं बनने देंगे। किसान संयुक्त मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य हन्नान मौला ने कहा, ये बहुत लंबा चलने वाला आंदोलन है। सरकार इसे जानबूझ कर लंबा खींच रही है। उसकी मंशा किसानों की मांगें मानने की है ही नहीं, इसलिए 11 बैठकें बेनतीजा रही।देश के 240 किसान इस आंदोलन में मारे गए, मगर सरकार को उससे कोई मतलब नहीं।
दरअसल, केंद्र सरकार और भाजपा की संवेदनाएं खत्म हो गई हैं। इनकी अपनी भावनाएं मर चुकी हैं, इसलिए इन्हें किसानों की भावनाओं का ख्याल नहीं है। किसान संगठनों ने बैठक में तय किया है कि अब बड़ी रैलियां आयोजित की जाएं। इनमें सारे नेता मौजूद रहें।दिल्ली की सीमाओं पर जो किसान बैठे हैं, वे आगे भी बैठे रहेंगे। फसल कटाई या कोई दूसरा काम होता है तो कुछ अपने गांव लौट जाएंगे। उनकी जगह पर दूसरे किसान आ जाएंगे। जैसे ही लगेगा कि अब किसान के पास समय है तो मोर्चे की तरफ से दिल्ली आने का आहृवान कर दिया जाएगा।